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सौ साल से अपनी जमीन के मालिक क्यों नहीं हैं लोग : हाईकोर्ट

Sun, 08 Jan 2017 12:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हाईकोर्ट - फोटो : file photo
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शिवालिक फुटहिल में मौजूद हजारों एकड़ जमीन के पीएलपीए (पंजाब लैंड प्रिजरवेशन एक्ट) की नोटिफिकेशन के अनुसार इस्तेमाल पर लगाई गई पाबंदियों को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। 
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राजा शिवदेव इंद्र सिंह व अन्य की याचिकाओं पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से जवाब तलब किया है। पूछा है कि आखिर क्यों इस क्षेत्र के लोग सौ साल से भी अधिक समय से अपनी ही जमीन पर मालिकाना हक पाने के लिए तरस रहे हैं। 

पंजाब सरकार से इस भूमि का रेवेन्यू रिकार्ड हाईकोर्ट में तलब किया है। मामला पीएलपीए नोटिफिकेशन के जरिए हजारों एकड़ जमीन को सभी प्रकार के इस्तेमाल के लिए लॉक करने से जुड़ा है।
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मामले में विभिन्न याचिकाओं के माध्यम से नोटिफिकेशन को चुनौती दी गई है। याचिकाओं में कहा गया है कि इस क्षेत्र के लोग सौ साल से भी अधिक समय से अपनी ही जमीन के मालिकाना हक के लिए तरस रहे हैं। 

'हजारों एकड़ जमीन के मलिकाना हक को तरस रहे हैं भूमालिक'

कोर्ट - फोटो : demo photo
साल 1914 में की गई नोटिफिकेशन के बाद से ही यहां पर निर्माण व अन्य प्रकार की पाबंदी होने के साथ ही विकास कार्यों को भी पूरी तरह से रोक दिया गया है। इसके चलते पूरे मोहाली व आसपास के क्षेत्र में मौजूद शिवालिक फुटहिल पर निर्माण व अन्य कार्य बाहित हो रहे हैं।

याची ने कहा कि पीएलपीए उस समय की जरूरत हो सकती थी, लेकिन इसे पूरी तरह से अस्थायी बनाया गया था। बावजूद इसके पंजाब सरकार की ओर से बार-बार नोटिफिकेशन के माध्यम से इस अवधि को बढ़ाया गया। नतीजा यह है कि सौ साल बीत जाने के बाद भी अभी तक इस नोटिफिकेशन को जारी रखा जा रहा है। 

हाईकोर्ट में पंजाब सरकार ने दलील दी है कि फारेस्ट लैंड होने के चलते किसी प्रकार के निर्माण कार्य को अनुमति दे पाना मुश्किल है। इस पर हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि मामले में सुप्रीम कोर्ट भी यह स्पष्ट कर चुका है कि पीएलपीए नोटिफाई लैंड फारेस्ट लैंड नहीं है। जब तक यह रेवेन्यू रिकार्ड में इसे फारेस्ट लैंड न माना जाए। 
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'पीएलपीए को क्यों मान रहे हो फारेस्ट लैंड'

कोर्ट
मुआवजे की मांग
सुनवाई के दौर में याचिकाकर्ताओं ने मुद्दा उठाया कि सौ साल से जब वे अपनी ही जमीन का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं तो क्यों न इस भूमि का अधिग्रहण कर लिया जाता है। इस पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगली सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार पूरा रेवेन्यू रिकार्ड लेकर आए।

इस दौरान यह बताया जाए कि कौन सा एरिया फारेस्ट लैंड (रेवेन्यू रिकार्ड के अनुसार) और कौन सा नहीं। साथ ही कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए यह भी कहा कि यदि लोगों को उनकी ही जमीन का हक नहीं देना है तो इस जमीन का अधिग्रहण कर इस जमीन के लिए उन्हें मुआवजा दिया जाए। 

ऐसा करने के बाद चाहे पूरी भूमि को जंगल बना दो हाईकोर्ट को कोई आपत्ति नहीं है। कोर्ट ने कहा कि जिस प्रकार लोगों को पीएलपीए के नाम पर परेशान किया जा रहा है वह सही नहीं है और इस दिशा में सरकार को कदम उठाने चाहिए।
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