कैप्टन ने कहा कि चीन को यह कठोर संदेश जाना चाहिए कि भारत उनके धोखे को और बर्दाश्त नहीं करेगा। कैप्टन ने ‘हिंदी-चीनी भाई भाई’ के नारे को खत्म करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ‘यदि चीन विश्व शक्ति है तो फिर हम भी हैं।’ उन्होंने कहा कि 60 साल की कूटनीति काम नहीं कर सकी और अब उनको यह बताने का समय आ गया है कि अब बहुत हो गया। उन्होंने टिप्पणी की कि चीनी लोगों पर भरोसा नहीं किया जा सकता और कहा कि 1962 से कई भारतीय क्षेत्र उनके कब्जे में हैं और वह स्पष्ट तौर पर अब और हिस्से पर कब्जा करने की कशिश कर रहा है।
अगर लाठियों से लड़ाना है तो आरएसएस को भेज दो: कैप्टन
कैप्टन ने कहा कि भारतीय फौज हथियारों, पत्थरों या कीलें जड़ीं राडों और लाठियों का मुकाबला करने में समर्थ है। अगर भारत सरकार चीनियों के साथ हाथापाई या लाठियों वाली लड़ाई लड़ना चाहती है तो उसे आरएसएस काडर को लड़ाई के मैदान में भेजना चाहिए। हमारे जवानों को हथियारों की जरूरत है। उन्हें स्पष्ट आदेश होने चाहिए कि वे अपने आप को बचाएं और किसी भी कीमत पर देश की रक्षा करने के लिए इन हथियारों का प्रयोग करने के लिए तैयार रहें।