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Chandigarh News: एचएसवीपी में शामिल रहेगा या अर्बन एस्टेट में मर्ज होगा हाउसिंग बोर्ड, तय करेगी कमेटी

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- कैबिनेट में हाउसिंग बोर्ड को मर्ज करने का रखा जा चुका है प्रस्ताव
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- सेक्टरों में पानी-सीवरेज की व्यवस्था जनस्वास्थ्य विभाग को देने की तैयारी
- स्टेट फेडरेशन की मांग- सेक्टरों में एक ही विभाग के जिम्मे हों सभी काम
अरुण शर्मा
चंडीगढ़। हाउसिंग बोर्ड को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) या फिर अर्बन एस्टेट में शामिल किया जाएगा, इसका निर्णय उच्चस्तरीय कमेटी तय करेगी। हाउसिंग बोर्ड को एचएसवीपी में शामिल करने का प्रस्ताव करीब तीन-चार वर्षों से चल रहा है। अभी निर्णय न होने के कारण हाउसिंग बोर्ड में ई-ऑक्शन से लेकर दूसरे कार्य पूरी तरह से सिरे नहीं चढ़ पा रहे हैं।
हरियाणा आवास बोर्ड अधिनियम-1971 के तहत हाउसिंग बोर्ड अस्तित्व में आया था। बोर्ड के गठन का उद्देश्य यही था कि राज्य सरकार के अधीन क्षेत्र के अंदर आवास योजना का क्रियान्वयन किया जा सके। हाउसिंग बोर्ड की बात करें तो अंतिम बार 26 मार्च और 23 अप्रैल 2025 को ई-ऑक्शन हुई थी। वहीं, एचएसवीपी में हाउसिंग बोर्ड को शामिल करने से पहले कुछ संगठनों की मांग है कि जो भी लंबित योजनाएं हैं, वह पूरी की जाएं या फिर निवेश से जुड़ी रकम वापस की जाए।
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एचएसवीपी के सीवरेज-पानी के कार्य जनस्वास्थ्य विभाग को देने के लिए पत्राचार
एचएसवीपी के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के सभी सेक्टरों में 2,72,739 रिहायशी प्लाॅट, 29,105 व्यावसायिक प्लाॅट और 1878 संस्थानों से जुड़ी संपत्तियां हैं। इस तरह से एचएसवीपी के सेक्टरों में 3,03,722 कुल प्लाॅट हैं। वर्ष 2016 में प्रदेश में जो सेक्टर 50 प्रतिशत से अधिक विकसित हो गए थे, उन्हें नगर निगम में शामिल करने की योजना बनाई गई थी। कुछ दिनों के लिए नगर निगम में कर्मचारी भेजे भी गए थे। कर्मचारी संगठनों व सेक्टरों के प्लाॅट मालिकों के विरोध के बाद बरसाती पानी और सड़कों की देखरेख का जिम्मा नगर निगम को साैंप दिया गया था। एक बार फिर से एचएसवीपी के सीवरेज-पानी के कार्यों को जनस्वास्थ्य विभाग को साैंपने के लिए मुख्यालय स्तर पर पत्राचार हो रहा है। चार वर्ष पहले जनस्वास्थ्य विभाग को नगर निगम में शामिल करने की योजना बनी थी। स्टेट फेडरेशन ऑफ ऑल सेक्टर्स के स्टेट वाइस प्रेसीडेंट कदम सिंह अहलावत की मांग है कि प्रदेश में एचएसवीपी के सेक्टरों में जो भी सेवाएं हैं, उन्हें केवल एक ही विभाग देखे। अलग-अलग विभागों को सेवाएं साैंपने से प्रदेश के सेक्टरवासियों को कई विभागों में चक्कर लगाने होंगे।
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हाउसिंग बोर्ड को एचएसवीपी या फिर अर्बन एस्टेट में शामिल किया जाएगा, इसका निर्णय कमेटी करेगी।
चंद्रशेखर खरे, मुख्य प्रशासक, एचएसवीपी।



हाउसिंग बोर्ड को किसी भी विभाग में शामिल कर दिया जाए, लेकिन संबंधित विभाग की योजनाओं में जिन आवेदकों के करोड़ों रुपये फंसे हुए हैं वह वापस होने चाहिए। यदि रुपये वापस नहीं हो सकते हैं तो जिस विभाग में हाउसिंग बोर्ड शामिल हो, उसे पुराने मामलों से पहले ही अवगत कराया जाए।
कुलदीप वत्स, प्रदेश अध्यक्ष, ऑल सेक्टर रेजीडेंस वेलफेयर एसोसिएशन


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