इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 स्थित संजय कॉलोनी में मंगलवार का दिन खामोशी और बेचैनी के बीच बीता। आम दिनों में जहां गलियों में बच्चों की खिलखिलाहट और रसोई से उठती रोटियों की खुशबू होती थी, वहां अब सिर्फ आंसू, चिंता और खामोश चूल्हे रह गए हैं। करीब 600 झुग्गियों वाली कॉलोनी को तोड़ने के लिए बुधवार सुबह 6 बजे प्रशासन की जेसीबी पहुंच जाएगी, जिसके लिए मंगलवार को ही भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
करीब तीन दशक से यहां रह रहे लोग आज खुद को बेघर महसूस कर रहे हैं। प्रशासन की तरफ से दिए गए घर तोड़ने के आदेश के बाद से कॉलोनी में दहशत और मायूसी का माहौल है। मंगलवार को कॉलोनी के कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले। लोग सदमे में हैं और अपने बच्चों के भविष्य को लेकर बेहद चिंतित हैं। यहां रहने वाले अधिकतर बच्चे आस-पास के स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं। अब उनके माता-पिता को समझ नहीं आ रहा कि वे उन्हें लेकर कहां जाएं। इस बीच मंगलवार को एस्टेट ऑफिस की तरफ से एक कैंप भी लगाया गया, ताकि जिन लोगों के पास 2006 का बायोमेट्रिक सर्वे में नाम और अन्य दस्तावेज हैं, उन्हें पक्का मकान दिया जाए। हालांकि, लोगों ने कहा कि कॉलोनी के अंदर 40-50 लोग हैं, जिनके पास 2006 का सर्वे है लेकिन कैंप का उद्देश्य मकान देना नहीं, सिर्फ लोगों की आंखों में धूल झोंकना था, क्योंकि अधिकतर को मना कर दिया गया। लोगों ने कहा कि जानबूझ कर छोटी-छोटी गलतियां निकाली गई और कुछ घंटे में ही कमियां पूरी करने को कहा गया। ऐसे में वह सरकारी विभागों में जाकर उन कमियों को कैसे पूरा कर सकते थे। यह प्रक्रिया कुछ दिन पहले शुरू करनी चाहिए थी ताकि वह कमियों को पूरा कर पाते।