चंडीगढ़। नि:संदेह गुरु ईश्वर से भी बड़ा होता है। पर गुरु भ्रष्ट अथवा दुराचारी हो, हजारों साल पहले जो गुरु थे और जो आज के गुरु अथवा अध्यापक हैं उनमें क्या अंतर है और क्या समानताएं हैं, डॉ. शंकर शेष द्वारा रचित नाटक ‘एक और द्रोणाचार्य’ इन्हीं पहलुओं पर प्रकाश डालता है। यह नाटक प्रसिद्ध अभिनेता, डायरेक्टर और रेडियो जॉकी सचिन शर्मा के कुशल निर्देशन में दो बार प्रदर्शित किया जा चुका है। 13 दिसंबर 2019 को सचिन शर्मा दुनिया में नही रहे। उन्हीं को श्रद्धाजंलि के तौर पर वीरवार को सेक्टर- 18 स्थित टैगोर थिएटर में नाटक एक और द्रोणाचार्य नाटक का मंचन किया गया। चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी और संवाद थिएटर ग्रुप की ओर से नाटक को कराया गया। यह नाटकशिक्षा पर तंज कसता है।
नाटक की कहानी में एक ईमानदार शिक्षक दिखाया गया है। लेकिन शिक्षा संस्थान का मालिक काफी गलत किस्म का इंसान होता है। एक दिन परीक्षा के समय शिक्षक मालिक के बेटे को नकल करते हुए पकड़ लेता है और उसकी शिकायत कर देता है। संस्थान का बेटे इससे पहले भी एक शिक्षक से उलझ चुका था और उसे जान से भी मार दिया था। इस बार फिर से वह शिक्षक से उलझ जाता है। संस्थान का मालिक शिक्षक पर काफी दवाब बनता है कि वह उसकेबेटे की शिकायत नहीं करे, लेकिन शिक्षक नहीं मानता, इसको देखते हुए संस्थान का मालिक शिक्षक को प्रिंसिपल बनने का ऑफर दे देता है। इस पर शिक्षक प्रिंसिपल का पद स्वीकार कर लेता है और उसके बेटे की शिकायत को रोक देता है।
इसके कुछ महीनों के बाद एक बार फिर से संस्थान के मालिक का बेटा पढ़ने वाली लड़की से दुराचार कर देता है। इसकी शिकायत होती है। शिक्षक एक बार फिर से उस लड़के के खिलाफ रिपोर्ट बनाना चाहता है, लेकिन दवाब में वह फिर से पीछे हट जाता है। इस पर लड़की की परिजन काफी दुखी होते हैं और कुछ न होता देख वह लड़की आत्महत्या का लेती है। इतनी बड़ी बात हो जाने से शिक्षक की आत्मा उसे कोसने लगती है। शिक्षक का आखिर में अहसास हो जाता है अगर पहले दिन से मैंने शिक्षा संस्थान का ऑफर न स्वीकार नही किया होता और लड़की की शिकायत सुनकर कार्रवाई करता हो तो पीड़ि लड़की आज जिंदा होती।
नाटक में इन कलाकारों ने हिस्सा लिया-
प्रोफेसर अरविंद का रोल संजय कुमार शर्मा
लीला -अन्नपूर्णा गौतम
द्रोणाचार्य -ज्योति भारद्वाज
विमलेंदु -हीरा सिंह
करिपी -रजनी बजाज
अनुराधा -दीक्षा शर्मा
चंदू -वेदप्रकाश
यदु -यशपाल कुमार
प्रेसिडेंट -मुकेश शर्मा
अश्वत्थामा -सार्थक सिंह
एकलव्य -प्रेम सिंघानिया
वकील वन रवि भूषण
वकील टू शुभम
जज अभिषेक ठाकुर
युधिष्ठिर प्रिंस
भीम बलवंत सिंह
भीष्म पितामह अरविंद शर्मा
बैकस्टेज कमल भारद्वाज ,विकास नेगी ,साजन शर्मा, शिवानी ठाकुर, शुभरा ,कविश