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पंजाब में ये हाल : दो दिन से मंडियों पर बैठे हैं किसान, न गेहूं की सरकारी बोली लग रही और न ही सुविधाएं मिल रहीं

Tue, 13 Apr 2021 01:04 PM IST
ajay kumar वरिन्दर राणा, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब)

सार

लुधियाना के जालंधर बाईपास स्थित अनाज मंडी में सोमवार तक महज 10 ट्राली गेहूं ही पहुंचा है लेकिन इसकी खरीद नहीं हो पाई है। किसान बिना सुविधा के मंडियों में परेशान हो रहे हैं। उनकी इस परेशानी पर आढ़ती भी चुप्पी साधे हैं। अनाज की बोली न होने पर इतना कह रहे हैं कि अभी गेहूं में नमी है, इसलिए बोली नहीं हो रही है।
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गेहूं की सफाई करते कर्मचारी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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पंजाब सरकार ने कागजों में गेहूं की खरीद शुरू कर दी है लेकिन लुधियाना की मंडियों में जमीनी सच्चाई कुछ और ही है। सूबे में सरकारी खरीद 10 अप्रैल से शुरू हुई। 11 अप्रैल से किसान अनाज मंडियों में फसल लेकर पहुंच गए हैं। हैरानी वाली बात है कि इन दो दिनों में कई जगह फसल की बोली तक नहीं हो पाई है। मंडी को मंत्री के उद्घाटन का इंतजार है, जिसके बाद ही खरीद शुरू होगी। इसके अलावा अधिकतर मंडियों में न तो पेयजल की सुविधा है और न ही शौचालय का प्रबंध है। यही नहीं, किसान रातभर जागकर लावारिस पशुओं से अनाज को बचाने के लिए मजबूर हैं।

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लुधियाना के जालंधर बाईपास स्थित अनाज मंडी में सोमवार तक महज 10 ट्राली गेहूं ही पहुंचा है लेकिन इसकी खरीद नहीं हो पाई है। किसान बिना सुविधा के मंडियों में परेशान हो रहे हैं। उनकी इस परेशानी पर आढ़ती भी चुप्पी साधे हैं। अनाज की बोली न होने पर इतना कह रहे हैं कि अभी गेहूं में नमी है, इसलिए बोली नहीं हो रही है। हालांकि असल मुद्दा कुछ और ही है। नेताओं को गेहूं की खरीद के बहाने वोट बैंक जुटाना है। सत्ताधारी पहले खरीद का उद्घाटन करते हैं, इसके बाद ही बोली शुरू की जाती है। 

रात को जागकर जानवरों से बचा रहे अनाज : गगन सिंह  
गांव माछियाकलां से आए युवा किसान गगन सिंह ने बताया कि वह भी 11 अप्रैल को एक ट्राली गेहूं लेकर पहुंचा था। अब तक कोई बोली लगाने नहीं आया है। रात में खुले शेड के नीचे जागकर लावारिस जानवरों से अनाज को बचाते हैं। दो दिन से खाना पीना सब अपनी जेब से कर रहे हैं। वहीं, गांव हवास से तीन ट्राली गेहूं लेकर पहुंचे अवतार सिंह ने बताया कि यह फसल एक सरकारी मुलाजिम की है और वह उनके यहां नौकरी करता है। चार ट्राली गेहूं बेचने के लिए 11 अप्रैल को आया है। फसल की खरीद तक यहीं रहना पड़ेगा। 

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सरकारी अफसर ही नहीं आ रहे : हरभजन सिंह 

लुधियाना के जालंधर बाईपास स्थित अनाज मंडी में 11 अप्रैल से दो ट्राली गेहूं बेचने आए गांव बलीपुर निवासी किसान हरभजन सिंह ने बताया कि दो दिन हो गए, कोई बोली लगाने नहीं आया। आढ़तियों के मजदूर फसल साफ कर रहे हैं। नियमानुसार रोज सुबह दस बजे और दोपहर दो बजे सरकारी अफसरों को बोली लगाने के लिए आना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। सुविधाओं के नाम पर पेयजल की व्यवस्था नहीं है। शौचालय का प्रबंध नहीं है। वह तो आढ़ती के सहारे यहां बैठे हैं। शौचालय जाना हो तो उनके दफ्तर में जाना पड़ता है। 
मैं सोमवार को खन्ना में मंत्री भारत भूषण आशु के साथ मंडियों में खरीद शुरू करवाने के लिए पहुंचा हूं। मुझे जानकारी नहीं है कि लुधियाना की अनाज मंडी में खरीद शुरू क्यों नहीं हुई है। इस संबंध में सभी अफसरों से जानकारी लेकर ही कुछ बता सकूंगा। -दविंदर सिंह कैंथ, जिला मंडी अफसर।
 
इस मंडी में खरीद की जिम्मेदारी मार्कफेड की है। खरीद क्यों नहीं हुई या फिर बोली क्यों नहीं लगी, इसके संबंध में मार्कफेड के अधिकारी ही बेहतर बता सकते हैं। जहां तक सुविधाओं की बात है तो शौचालय बने हैं और पानी का इंतजाम भी है। इस बार कोरोना के कारण किसानों को ठंडा पानी नहीं देना है, इसलिए इसकी अलग व्यवस्था की गई है। -टेक बहादुर सिंह, सचिव, मंडी बोर्ड।

मार्कफेड के मैनेजर राजविंदर सिंह से सीधी बात
  • सवाल: जालंधर बाईपास स्थित मंडी में खरीद कितनी की गई?
  • जवाब: मैंने बारदाना भेज दिया था। 
  • सवाल: खरीद क्यों शुरू नहीं की गई?
  • जवाब: गेहूं में थोड़ी नमी थी और सफाई होने वाली थी।
  • सवाल: गेहूं में कितने प्रतिशत नमी पाई गई है?
  • जवाब: थोड़ी थी, किसान और आढ़ती को सफाई के लिए कहा गया है।
  • सवाल: मंत्री भारत भूषण आशु कब उद्घाटन करने आ रहे हैं?
  • जवाब: मुझे मैसेज तो आया है, पता नहीं मंगलवार या बुधवार को।
  • सवाल: मंत्री के उद्घाटन से पहले आप खरीद कैसे करेंगे?
  • जवाब: अभी गेहूं आना शुरू हुआ है, वैसे भी किसान बैसाखी के बाद ही आते हैं।
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