पंजाब की मंडियों में जहां गेहूं की आवक और खरीद में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है, वहीं राज्य में इस बार भीषण गर्मी किसानों के लिए बहुत बड़ी मुसीबत बनती जा रही है। आमतौर पर अप्रैल माह में दिन का तापमान 30-35 डिग्री सेल्सियस तक रहता है लेकिन इस साल तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिसके चलते गेहूं का दाना सिकुड़ने लगा है। किसानों ने यह मामला राज्य सरकार के समक्ष उठाया है और प्रदेश सरकार ने भी केंद्र को इस संबंध में जानकारी दे दी है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीद के लिए केंद्र सरकार ने कुछ शर्तें तय की है। इनके अनुसार फसल में नमी की मात्रा, धूल के कण के अलावा दानों का फैलाव और सिकुड़न का भी आकलन किया जाता है। एमएसपी पर खरीद के लिए गेहूं के दानों की छह प्रतिशत तक सिकुड़न स्वीकार्य है लेकिन किसानों का कहना है कि इस बार दानों की सिकुड़न 20-25 फीसदी तक पहुंच गई है। इसके साथ ही पैदावार पर भी इसका बुरा असर पड़ा है और फसल 10-25 फीसदी तक कम हुई है।
भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने कहा है कि राज्य सरकार को गर्मी के इस मौसम के कारण किसानों को हुए नुकसान की भरपाई करनी चाहिए। गर्मी के अलावा फसल खराब होने का कारण पानी और बिजली की बाधित आपूर्ति भी है। उधर, भाकियू एकता-डकोंदा के प्रदेश प्रधान बूटा सिंह बुर्जगिल और महासचिव जगमोहन सिंह पटियाला का कहना है कि मार्च माह के दौरान अत्याधिक गर्मी के कारण गेहूं का दाना सिकुड़ गया है और पैदावार भी 10-15 फीसदी तक कम हुई है। उन्होंने गर्मी को प्राकृतिक आपदा मानते हुए किसानों को 300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मुआवजा देने की मांग की है।
राज्य सरकार ने केंद्र से नियमों की ढील देने की मांग की
पंजाब सरकार ने गेहूं के दाने में बढ़ी सिकुड़न को लेकर केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि फसल खरीद के नियमों में ढील दी जाए। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के सचिव ने केंद्र सरकार को लिखे पत्र में कहा है कि एफसीआई का क्षेत्रीय कार्यालय भी अपने स्तर पर गेहूं के नमूने एकत्र कर रहा है, जिसके आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि फसल में छह फीसदी सिकुड़न की शर्त में ढील दी जाए ताकि किसानों को नुकसान न हो।
यह एक प्राकृतिक बदलाव है और किसानों के खेती के तरीके से इसका कुछ लेना-देना नहीं है। सिकुड़न की वजह से किसानों का गेहूं न खरीदना नाइंसाफी है। - लालचंद कटारूचक, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति व उपभोक्ता मामले मंत्री