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Chandigarh News: हमेशा साथ नहीं तो क्या गम है... आपके लिए धड़कता ये दिल है

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चंडीगढ़। वैलेंटाइन डे पर जब ज्यादातर लोग साथ बैठकर अपने रिश्तों का जश्न मनाते हैं, तब चंडीगढ़ और कश्मीर के बीच फैली दूरी में भी एक रिश्ता हर दिन नए सिरे से महकता है। यह कहानी है डीएवी कॉलेज की केमिस्ट्री की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. क्षमा और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी श्रीनगर में फिजिक्स के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विजय कुमार शर्मा की जिन्होंने साबित किया है कि साथ लंबा नहीं, खास होना चाहिए।
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दोनों की मुलाकात पीएचडी के दौरान जालंधर में हुई। रिसर्च की चर्चा से शुरू हुई बातचीत धीरे-धीरे जीवन के सवालों तक पहुंची। एक-दूसरे का व्यवहार, समझ और संवेदनशीलता इतनी भायी कि उन्होंने साथ जिंदगी बिताने का फैसला कर लिया। शादी के बाद भी दोनों का कॅरिअर अलग-अलग शहरों में आगे बढ़ा, लेकिन उनके रिश्ते की डोर कभी ढीली नहीं पड़ी। चंडीगढ़ में पढ़ाती क्षमा जब लैब में छात्रों के साथ प्रयोग करती हैं तो कश्मीर की वादियों में पढ़ाते विजय के साथ शाम की वीडियो कॉल उनका सुकून बन जाती है। दोनों मानते हैं कि दूरी ने उन्हें अलग नहीं बल्कि और मजबूत बनाया है। डॉ. क्षमा बताती हैं कि कई बार जिम्मेदारियों का बोझ मन में सवाल उठाता है कि सब कुछ छोड़कर विजय के पास चली जाऊं। लेकिन फिर सोचती हूं कि रिश्ते निभाना सिर्फ पास रहना नहीं, एक-दूसरे के सपनों को समझना भी है। जिम्मेदारियां और प्यार साथ लेकर चलना ही जिंदगी है।

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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संभाला खुद को

डॉ. विजय भी मुस्कुराते हुए कहते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान क्षमा बहुत डर गई थी। वह सब कुछ छोड़कर कश्मीर आने का मन बना चुकी थी लेकिन उसने समझदारी दिखाई। उसने हमारे रिश्ते के साथ-साथ अपने कॅरिअर और परिवार को भी प्राथमिकता दी। वही संतुलन हमारे रिश्ते की ताकत है। दो शहर, दो कॉलेज, दो अलग टाइम-टेबल लेकिन एक साझा विश्वास। कभी चंडीगढ़ की सर्द शाम में तो कभी कश्मीर की बर्फीली सुबह में... दोनों का प्यार एक-दूसरे के संदेशों, कॉल्स और छोटे-छोटे सरप्राइज में जीवित रहता है।
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वैलेंटाइन डे पर उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि प्यार की गर्माहट दूरी से नहीं घटती। अगर साथ समझ, भरोसे और सम्मान का हो तो हजारों किलोमीटर भी दो दिलों के बीच फासला नहीं बन पाते। इनका कहना है कि सच ही तो है कि साथ लंबा नहीं, खास हो तो जिंदगी खुद-ब-खुद खुशनुमा बन जाती है।
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