साहित्य के करीब.. प्रकृति के नजदीक और ट्रैकिंग का शौक। यह है अपनी उम्दा कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले चंडीगढ़ प्रशासक के सलाहकार और आईएएस अधिकारी मनोज परिदा। इनका अपनों के प्रति नजरिया कुछ खास है। चंडीगढ़ के लोगों से वह दिल से जुड़े हैं। चंडीगढ़ की बात निकलते ही साफ बोलते हैं..ऐसा सिटी नहीं देखा...यह मेरी सोच से आगे है।
प्रश्न-आप आईएएस क्यों बनना चाहते थे?
उत्तर- यही एक सेवा है जो युवावस्था में आपको एक बड़े पद पर पहुंचाता है। कई पोजीशन और प्रोफेशन का एक सीमित दायरा है पर आईएएस बनने पर सीधा आपको जनता की सेवा का सीधा अधिकार मिलता है। आईएएस बनते ही आपको कलेक्टर या किसी अन्य बड़ी पोस्ट पर लगाया जाता है। मेरी बचपन से ही ऐसी सेवा करने की तमन्ना थी।
प्रश्न-आपको चंडीगढ़ कैसा लगता है?
उत्तर- चंडीगढ़ वास्तव में मेरी सोच से काफी आगे है। यह एक साफ सुथरा, हरियाली का आवरण ओढ़ने वाला सिटी है। वास्तव में चंडीगढ़ को मैं इसलिए ज्यादा पसंद करता हूं, क्योंकि यहां के लोग काफी सिविलाइज्ड हैं, काफ्री आशावादी हैं और यहां की संस्कृति में रचे बसे हैं। मैं अगर यहां के लोगों के बारे में कहूं तो यह काफी दरियादिल हैं।
प्रश्न-आप उदास कब हो जाते हैं?
उत्तर- कई बार मैं देखता हूं कि चंडीगढ़ में जाम लगता है। वास्तव में इतने सिविलाइज्ड कल्चर के सिटी में जाम की स्थिति मुझको कचोटती है। उस समय मन में थोड़ी टीस उठती है। इसके अतिरिक्त कई बार जब ट्रैफिक के नए नियम बनाए जाते हैं तो उसको भी लोग नहीं मानते हैं यह बात भी दर्द देने वाली होती है। क्योंकि जहां तक चंडीगढ़ के लोगों को मैं जानता हूं, एक बड़ा वर्ग है जो कि रात के वक्त भी रेड लाइट होने पर अपने वाहनों को रोक लेता है।
प्रश्न-आपकी नजर में चंडीगढ़ के लिए चुनौतियां क्या हैं?
उत्तर- चंडीगढ़ वास्तव में 114 स्क्वैयर फुट में बसा सिटी है। इसकी आबादी अब पर्याप्त और मैं कहू्ं तो हद से ज्यादा है। इसी वजह से आने वाले समय में यहां ट्रैफिक कंजेशन, पार्किंग प्राब्लम जैसी प्रमुख चुनौतियां हैं। वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही हैं। इससे व्हीकल पाल्यूशन होने लगा है। चंडीगढ़ की इन चुनौतियों से उबरने के लिए प्रशासन द्वारा प्लान किया जा रहा है। इसमें आउटर रिंग रोड, मोनो रेल, पब्लिक ट्रांसपोर्ट को वरीयता, मिनी बस सेवाएं पर काफी वर्क हो रहा है। इसके साथ ही इंडस्ट्री के लिए भी प्रशासन वर्क कर रहा है।
प्रश्न-आप क्या पसंद करते हैं?
उत्तर- मुझे किताबें पढ़ने का शौक है। म्यूजिक सुनना मुझे काफी अच्छा लगता है। इसके साथ ही जब कभी खाली होता हूं तो ट्रैैकिंग करने चला जाता हूं। हां, सबसे अहम कि मैं अपनी फिटनेस के प्रति सजग हूं। साइकिलिंग, ट्रैकिंग और योग करता हूं।