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Chandigarh News: पति के जेल में होने पर महिला के लिए क्या है योजना, प्रशासन बताए

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चंडीगढ़। पत्नी के गर्भवती होने पर उसे अस्पताल ले जाने और वहां विवाहिता के नाबालिग होने का पता चलने पर पति के सलाखों के पीछे पहुंचने का मामला कुछ समय पहले सामने आया था। इस मामले में बेसहारा आठ माह की गर्भवती पत्नी की दयनीय स्थिति पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए अब यूटी प्रशासन से कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी तलब की है। हालांकि आरोपी पति को अब जमानत मिल चुकी है। पति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया था कि उसका विवाह हिंदू रीति रिवाज से हुआ है। जब उसकी पत्नी गर्भवती हुई और वह उसे चंडीगढ़ के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचा तो बताया गया कि पत्नी नाबालिग है। इसके बाद पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में उसने नियमित जमानत की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी। इस याचिका का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने पति को आठ माह की गर्भवती पत्नी की देखभाल व बच्चे की परवरिश के लिए जमानत देने का आदेश जारी कर दिया था।
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इस आदेश के बाद हाईकोर्ट ने अब इस मामले का संज्ञान ले लिया है। कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की स्थिति पैदा होने पर पत्नी बेसहारा हो जाती है क्योंकि पॉक्सो एक्ट में पति जेल में चला जाता है। ऐसे में पत्नी व उसके गर्भ की सुरक्षा व कल्याण का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि विवाह के बाद महिला के लिए पति ही संरक्षक होता है और ऐसे में उसके जेल में होने की स्थिति में पीड़ित महिला का कल्याण कैसे सुनिश्चित होगा। इस बारे में जवाब दाखिल करने का हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को आदेश दिया है। यूटी प्रशासन की ओर से सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल अनिल मेहता ने इस मामले में
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नोटिस स्वीकार करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए कुछ समय की मांग की। हाईकोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए प्रशासन को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
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