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नारी के स्वाभिमान को ललकारने का क्या होता है हश्र.. दिखाया नाटक में

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टैगोर थिएटर में नाटक का मंचन करते कलाकार। - फोटो : CHANDIGARH
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चंडीगढ़। नारी को कमजोर समझने वाले.. धरा क्या, आसमान तक को भी छू सकती है वह.. एक बार घर की दहलीज लांघने की इजाजत तो दो.. इसी सोच को टैगोर थिएटर में संवाद थिएटर ग्रुप ने नाटक के जरिए दर्शकों के सामने रखा। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर शनिवार को हिंदी नाटक ‘केसर- नारी का स्वाभिमान’ का मंचन किया गया। राजेश आत्रेय के लिखे इस नाटक का निर्देशन यशपाल कुमार और नाटक में मार्गदर्शन मुकेश शर्मा ने किया।
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इसकी कहानी कन्या भ्रूण हत्या और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों के साथ शुरू होती है और अंत महिला सशक्तिकरण के साथ होता है। कहानी में दिखाया कि सुखप्रीत गांव में रहने वाली जागरूक महिला है जबकि उसका पति बलवंत एक संकीर्ण मानसिकता वाला व्यक्ति है। उसे लड़कियों से सख्त नफरत है। जब सुखप्रीत एक लड़की को जन्म देती है तो उसका पति बलवंत उस लड़की को मारने या कहीं छोड़ आने के लिए कहता है। सुखप्रीत न चाहते हुए भी उस लड़की को बाहर छोड़ देती है। इसे परमजीत संभालती है। परमजीत कीपहले भी एक लड़की है जिसका नाम केसर है और परमजीत का पति दलबीर भी लड़कियों के खिलाफ है। परमजीत के पति को उसका यह काम पसंद नहीं आता, लेकिन परमजीत की जिद के कारण वह कुछ कर नहीं पाता। परमजीत इस लड़की को बहुत ही प्यार दुलार से पालती है और उसका नाम छोटी रखती है।
छोटी बड़ी हो जाती है तो दलवीर उसे उसके असली बाप बलवंत को ही बेच देता है। बलवंत छोटी का शोषण करने की कोशिश करता है, उसी समय सुखप्रीत वहां पहुंच जाती है। वह बलवंत को एक थप्पड़ मारती है और उसे बताती है कि जिससे वह दुष्कर्म करने की कोशिश कर रहा था वह उसकी अपनी ही बेटी है। यह सुनकर बलवंत सुखप्रीत से माफी मांगता है, लेकिन सुखप्रीत उसे कहती है, तूने एक औरत को धोखा दिया माफ किया, बीवी को धोखा दिया माफ किया, लेकिन आज तूने अपनी बेटी के साथ ऐसा दुष्कर्म करने की कोशिश की तुझे कभी माफ नहीं करूंगी। जब परमजीत छोटी को लेकर अपने घर लौटती है और केसर को इस बात की जानकारी होती है तो केसर अपने बाप दलवीर का कत्ल कर देती है। अंत में परमजीत संदेश देते हुए कहती है कि जहां इस समाज में सती, सावित्री और सीता हैं। वहीं इस समाज में चंडी, दुर्गा और काली भी हैं। जहां औरत अपना घर संभाल सकती हैं, वह इन दरिंदों का सामना भी कर सकती हैं और केसर ने वही किया। मेरी केसर गुनहगार नहीं है, वह आज दुर्गा बनी है। आज की दुर्गा, मेरी दुर्गा, कलयुग की दुर्गा और यह केसर आप सब में भी हैं।
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इन कलाकारों ने किया अभिनय
नाटक की अवधि डेढ़ घंटे की थी। नाटक में संजय कुमार, अमेय, रजनी बजाज, मोहन शर्मा, विकास नेगी, साजन शर्मा, अरविंद शर्मा, सचिन, अनुष्का तिवारी, दृष्टि, सरगम, श्रेया, चैरी, हीतिका, मोनू, हिमांशी, हन्नी, साजन, राजन अरोरा, राहुल पाल, कमल, वेद प्रकाश, मुक्करम अली, राज कटारिया, कृश, चिरायु और रोबिन ने अभिनय किया।
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