आम बजट के दौरान ही रेल बजट भी पेश किया गया। इस रेल बजट के दौरान विभिन्न मदों के तहत बजट राशि बढ़ाई गई है। जिसका फायदा हरियाणा, पंजाब, हिमाचल व चंडीगढ़ में चल रही रेल परियोजनाओं को कुछ हद तक जरूर होगा। लेकिन इन क्षेत्रों की पूर्व घोषित परियोजनाएं कैसे रफ्तार पकड़ेगी, इसके लिए बजट में कुछ भी स्पष्ट नहीं है।
हालांकि हरियाणा इसके लिए अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है। इसके लिए हरियाणा सरकार ने लटकी रेल परियोजनाओं की व्यवहारिक रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक विशेष कमेटी का गठन कर दिया है, जो रेलवे मंत्रालय से लाइजनिंग कर इन परियोजनाओं के लिए बजट का प्रावधान करवाएगी।
हरियाणा में यमुनानगर वाया नारायणगढ़-सढौरा-चंडीगढ़ नई रेल लाइन, दिल्ली-सोहना- नूंह-फिरोजपुर झिरका-अलवर नई रेल लाइन, फरूखनगर-झज्जर- चरखी-दादरी नई रेल लाइन, हांसी-नारनौल नई रेल लाइन, जींद-हिसार नई रेल लाइन , भिवानी-लोहारू नई रेल लाइन, करनाल-यमुनानगर नई रेल लाइन, मानेसर से पाटली रेलवे स्लाइडिंग परियोजना, रोहतक रेलवे स्टेशन पर एलीवेटर कारीडोर प्रोजेक्ट व सोनीपत रेलवे कोच फैक्टरी प्रोजेक्ट पेंडिंग पड़े हैं। इसी तरह चड़ीगढ़-बद्दी रेलवे लाइन प्रोजेक्ट भी अभी कागजों में हैं।
इसी तरह पंजाब, हरियाणा और हिमाचल के कुछ स्टेशन को ए-वन और आदर्श स्टेशन बनाने संबंधी परियोजना भी बजट की कमी की वजह से सिरे नहीं चढ़ पा रहे हैं। पंजाब में कई नई लाइनों के प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। फ्रांसिसी रेलवे की मदद से अंबाला और चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन को वर्ल्डक्लास (ए-वन) बनाने की परियोजना भी कागजों से अभी तक बाहर नहीं निकली।
डबलिंग प्रोजेक्ट्स व ट्रैक मेनटेनेंस को रफ्तार मिलेगी
रेल बजट
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उधर, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के अनुसार राज्य सरकार ने रेलवे मंत्रालय के साथ मिलकर हरियाणा रेल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन का गठन किया है, जो राज्य में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का कार्य करेगा। ये कारपोरेशन की फिजीबिलिटी रिपोर्ट 10 महीनों में तैयार होगी। 20 करोड़ रुपये की लागत से इन सभी रेल लाइनों की रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
डबलिंग प्रोजेक्ट्स व ट्रैक मेनटेनेंस को रफ्तार मिलेगी
हरियाणा व पंजाब कुछ ट्रैक ऐसे हैं जिन्हे डबलिंग किया जा रहा है। कई लाइनों को विद्युतीकरण से लैस किया जा रहा है। क्षेत्र की पटरियों को को मेंटेनेंस की भी जरूरत है। क्योंकि अत्यधिक सर्दी व अत्यधिक गर्मी के दौरान पटरियां चटकने लगती है, जिससे कई बार डी-रेलमेंट की घटनाएं हो चुकी है। इसके लिए रेल बजट में खास प्रावधान किया गया है। रेल बजट में इस बार पुरानी पटरियों को हटाक र नई बिछाने का टारगेट 3600 रूट किमी से बढ़ाकर 3900 रूट किलोमीटर किया गया है।
जबकि नई लाइन बिछाने का टारगेट 402 रूट किमी से बढ़ाकर 1000 किलोमीटर किया गया है। रेल ट्रैक विद्युतिकरणी का टारगेट 4000 रूट किलोमीटर से बढ़ाकर 6000 किलोमीटर किया गया है। डबलिंग लाइन का टारगेट 945 रूट किलोमीटर से बढ़ाकर 2100 रूट किलोमीटर किया गया है।
आम बजट के दौरान पेश किया गया रेल बजट काफी संतुलित है। नई परियोजनाएं तो सामने आएंगी, साथ ही पुरानी परियोजनाओं को भी रफ्तार मिलेगी। यात्रियों की सुविधा, संरक्षा और सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। रेलवे की आर्थिक व्यवस्था भी सुदृढ़ बनेगी। रेल उपभोक्ताओं का भी खास ध्यान रखा गया है। बजट रेलवे को और मजबूती देगा।
-प्रवीण गौड़ द्विवेदी, वरिष्ठ मंडल वाणिज्यिक प्रबंधक, अंबाला मंडल
पूर्व रेल मंत्री की प्रतिक्रिया
Pawan Kumar Bansal
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केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ प्रशासन के साथ नाइंसाफी की है। जो बजट प्रशासन को मिला है, उससे कोई नया प्रोजेक्ट नहीं शुरू हो सकता। वहीं, जो प्रोजेक्ट चल रहे हैं, उनके भी प्रभावित होने की संभावना है। बजट में से 2355 करोड़ स्थापना व्यय के लिए चाहिए। 828 करोड़ बिजली खरीदने में चले जाएंगे।
कैपिटल बजट के लिए सिर्फ 345 करोड़ ही बचेंगे। इससे शहर का विकास प्रभावित होगा। पिछले चार साल से एनडीए सरकार के कार्यकाल में चंडीगढ़ की बजट के मामले में अनदेखी हुई है। इस साल पिछले साल के मुकाबले भी बजट कम मिला है। 2017-18 में कुल बजट 4084 करोड़ मिला है, जबकि पिछले साल 4277 करोड़ का था। चंडीगढ़ से केंद्र सरकार को टैक्स के तौर पर 5500 करोड़ की कमाई होती है। इस कमाई का नगर निगम 30 प्रतिशत हकदार है, लेकिन पिछली बार की तरह नगर निगम को 269 करोड़ मिले हैं।
-पवन बंसल, पूर्व रेल मंत्री