होर्मुज मार्ग बंद होने से बढ़ी परेशानी
ईरान ने इस साल फरवरी में अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य बंद कर दिया था। बासमती चावल के निर्यात के लिए यह मार्ग महत्वपूर्ण है। पंजाब से सबसे अधिक बासमती ईरान को निर्यात किया जाता है। इसके अलावा इराक, संयुक्त अरब अमीरात और यमन समेत मध्य पूर्व के कई देशों में भी चावल भेजा जाता है। यूरोपीय संघ, तुर्किये और ब्रिटेन भी पंजाब के बासमती के प्रमुख बाजारों में शामिल हैं।
तीन हजार डॉलर तक पहुंचा समुद्री भाड़ा
पंजाब बासमती मिलर्स एंड एक्सपोर्ट एसोसिएशन के वित्त सचिव नरेश गोयल ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग बंद होने के कारण समुद्री भाड़ा 500 डॉलर से बढ़कर 3000 डॉलर तक पहुंच गया है। निर्यात में देरी होने से भुगतान भी समय पर नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि फरवरी से अब तक करीब 60 करोड़ रुपये का निर्यात प्रभावित हुआ है। इससे पहले काफी समय तक निर्यात पूरी तरह बंद भी रहा था। यदि होर्मुज मार्ग जल्द नहीं खुला तो निर्यातकों को आगे और नुकसान उठाना पड़ सकता है।
बासमती चावल के निर्यात में आई गिरावट
एसोसिएशन के प्रधान बाल कृष्ण बाली ने बताया कि बासमती का निर्यात जारी है, लेकिन इसमें पहले के मुकाबले अधिक समय लग रहा है। इससे निर्यातकों की लागत बढ़ रही है और कारोबार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब के अलावा पड़ोसी राज्यों से भी करीब सात लाख टन बासमती आता है। इस तरह कुल 22 लाख टन बासमती का निर्यात करना है, लेकिन मौजूदा हालात में इसे पहले की तरह जारी रखना बड़ी चुनौती बन गया है। बाली के अनुसार, पूरे देश से करीब 48 हजार करोड़ रुपये का बासमती चावल निर्यात होता है, जिसमें पंजाब की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है। ऐसे में युद्ध जल्द समाप्त होना और होर्मुज मार्ग से निर्यात सामान्य होना जरूरी है, ताकि कारोबार पहले की तरह पटरी पर लौट सके।