केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की रिपोर्ट के तहत हरियाणा उन सात राज्यों में शामिल है, जहां भूजल का दोहन सबसे अधिक हो रहा है। इसको लेकर चिंतित हरियाणा सरकार ने प्रदेश में सिंचाई के तौर-तरीके बदलने को कमर कसी है। इसके चलते सरकार ने वर्ष 2018-19 का एक्शन प्लान भी तैयार कर लिया है।
कृषि एवं बागवानी विभाग के साथ-साथ सरकार के आठ विभाग मिलकर इस अभियान में जुटेंगे। इसके अंतर्गत हरियाणा सरकार प्रदेश की खेती को माइक्रो इरिगेशन बेस्ड करना चाहती है। हालांकि प्रोजेक्ट पूरे प्रदेश के लिए है, लेकिन प्रदेश के वे 36 ब्लॉक जो अत्यधिक भूजल दोहन की वजह से डार्क जोन में जा चुके हैं, उन पर खास फोकस रहेगा।
इन 36 डार्कजोन ब्लॉकों में ज्यादा खतरा
हरियाणा सरकार ने विभिन्न जिलों के 140 ब्लॉक ऐसे चिह्नित किए हैं, जिन्हे माइक्रो इरिगेशन प्रोजेक्ट्स के तहत कवर किया जाना है। इनमें से 71 ब्लॉक ऐसे हैं, जो ज्यादा भूजल दोहन से प्रभावित है। लेकिन इनमें 55 ब्लॉक ओवर एक्पलॉयटिड, 11 सेमी क्रिटिकल और 5 क्रिटिकल है। जबकि इन्ही में 36 ब्लॉक ऐसे हैं, जिन्हे डार्क जोन में डाल दिया गया है। यानी इन इलाकों में भूजल दोहन इतना ज्यादा हो चुका है कि वहां स्थिति अब खराब है। लिहाजा सरकार का प्रथम चरण में फोकस इन्ही 36 ब्लॉक में होना है।
डार्क जोन ब्लॉक में भिवानी का बाढड़ा, केरू, लोहारू, बहल व तोशाम, कुरुक्षेत्र का लाडवा, पहोवा व शाहबाद, फतेहाबाद का टोहाना, करनाल खंड, गुरुग्राम का फरूखनगर, पटौदी, सोहना व गुरुग्राम खंड, पानीपत का बपौली व समालखा, कैथल का गुहला व राजौंद, सिरसा का रानिया व ऐलनाबाद, पलवल का हसनपुर, हाथीन, होडल व पलवल खंड, फरीदाबाद का म्यूनिसिपल एरिया व बल्लभगढ़, यमुनानगर का जगाधरी, मुस्तफाबाद, रादौर व सढौरा, रेवाड़ी का खोल और महेंद्रगढ़ का नांगलचौधरी, नारनौल, कनीना, अटेली व महेंद्रगढ़ ब्लॉक शामिल है।
ये है सरकार का एक्शन प्लान
हरियाणा में माइक्रो इरीगेशन के तहत ड्रिप और स्प्रिकलर पद्धति से सिंचाई करने के लिए किसानों को तैयार करना है। इसके लिए सरकार 1769800000 (करीब 1.76 अरब) रुपये खर्च करेगी। इसमें 8606.67 लाख रुपये का हिस्सा केंद्र सरकार देगी।
इसमें किसानों के लिए माइक्रो इरिगेशन का सेटअप लगाने से लेकर उनकी ट्रेनिंग, विदेश दौरा, टेक्निकल स्टाफ का स्टडी टूर, वर्कशॉप, जागरूकता पब्लिसिटी से लेकर अन्य गतिविधियां शामिल है। जबकि कृषि एवं बागवानी के अलावा वॉटर डेवलपमेंट, रूरल डेवलपमेंट, सिंचाई, कैचमेंट एरिया डेवलपमेंट अथारिटी, वन विभाग व हरेडा भी काम करेंगे।