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इंतजार खत्म: ट्राइसिटी को 28 से मिलने लगेगा 40 एमजीडी अतिरिक्त पानी, सांसद खेर करेंगी उद्घाटन

Mon, 23 Sep 2019 12:35 PM IST
खुशबू गोयल नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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घर-घर तक पहुंचेगा पानी
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कजौली वाटर वर्क्स के फेज 5 और 6 से आने वाला अतिरिक्त पानी ट्राइसिटी को 28 सितंबर से मिलने लगेगा। कजौली वाटर वर्क्स से दो फेज में आने वाले 40 एमजीडी अतिरिक्त पानी में से चंडीगढ़ को 29 एमजीडी, मोहाली को 5 एमजीडी और पंचकूला व चंडी मंदिर को 3-3 एमजीडी अतिरिक्त पानी मिलेगा। सांसद किरण खेर और प्रशासक वीपी सिंह बदनौर 28 सितंबर को इसका उद्घाटन करेंगे। अतिरिक्त पानी मिलने से पेयजल संकट खत्म हो जाएगा।
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वर्षों से शहर में अतिरिक्त पानी की उम्मीद लगाए बैठे लोगों के लिए यह किसी बड़ी खुशखबरी से कम नहीं है। अतिरिक्त पानी का आश्वासन सुन-सुन कर लोग भी थक चुके थे। शहर से लगभग 23 किमी दूर कजौली वाटर वर्क्स के फेज पांच और छह के लिए पानी की लाइन बिछाई गई है। इससे चंडीगढ़, चंडी मंदिर आर्मी एरिया, पंचकूला और मोहाली को पानी मिलना है। चंडीगढ़ में यह पाइप लाइन सेक्टर-39 में आती है। शहर को 1319.5 लाख लीटर (29 एमजीडी) अतिरिक्त पानी आना है। पाइप लाइन बिछाने के बाद जब भी ट्रायल हुआ कहीं न कहीं लीकेज आ जाती थी। इससे काम फिर से नए सिरे से शुरू करना पड़ता था।

हालांकि मेयर राजेश कालिया से लेकर निगम कमिश्नर केके यादव ने 15 अगस्त से शहर को अतिरिक्त पानी दिए जाने की घोषणा कर दी थी, लेकिन तब तक टेस्टिंग ही पूरी तरह से नहीं हो सकी। इससे लोगों को फिर निराश होना पड़ा। 26 अगस्त को जब कजौली वाटर वर्क्स से आने वाली चारों फेज से पानी सप्लाई बंद हो गईं तब अतिरिक्त पानी की कमी शहर को काफी खली, लेकिन अब लोगों का सपना पूरा होने जा रहा है।
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रेलवे-गमाडा के झगड़े में से भी पड़ा असर

शहर के लिए अतिरिक्त पानी की सप्लाई मई 2019 में ही आ जानी थी, लेकिन हाई प्रेशर पानी होने के बावजूद मोरिंडा ओवर ब्रिज के निकट रेलवे लाइन और गांव मंडौली में रेलवे लाइन के नीचे बिछी पाइप लाइन टूट गई। उसके बाद से गमाडा और रेलवे एक दूसरे पर लापरवाही का आरोप लगाते रहे। कई बार कहने के बावजूद रेलवे ने लाइन को ठीक नहीं किया गया। निगम ने दोनों की सहमति का इंतजार किया, लेकिन कोई हल नहीं निकला। उसके बाद प्रशासक से अपील कर दोनों पक्षों को बुलाकर मामले का निराकरण करने को कहा गया था। इसके बाद प्रशासक के निर्देश पर रेलवे ने काम कराया।

बार-बार लीकेज से दो साल देरी से हुआ काम
कजौली वाटर वर्क्स से पानी 2017 में ही आना था। इस प्रोजेक्ट में रेलवे, गमाडा और नगर निगम को मिलकर काम करना था। नगर निगम ने समय रहते पूरा फंड गमाडा को उपलब्ध करा दिया। रेलवे को दो जगह पाइप लाइन डालनी थी। समय से पूरा काम करने के बावजूद नगर निगम को ही पानी के लिए बार बार परेशान होना पड़ रहा था। गमाडा ने दो साल देरी से काम पूरा किया। जब टेस्टिंग की गई तो बार बार पाइप लाइन लीकेज हो गई। इसका सबसे ज्यादा नुकसान चंडीगढ़ को ही हुआ।

पहले चार फेज में पानी की हिस्सेदारी
शहर    एमजीडी
चंडीगढ़    14.5
मोहाली    02.5
चंडीमंदिर     01.5
पंचकूला    01.5

गर्मियों में हर साल बढ़ जाती है समस्या

सेक्टर-39 वाटर वर्क्स से शहर के सेक्टर-12, 26, 32, 37, 52 और मनीमाजरा के दो वाटर वर्क्स को पानी सप्लाई होता है। वहां से संबंधित वाटर वर्क्स से जुड़े एरिया के लगभग 1 लाख 56 हजार लोगों तक पानी पहुंचता है। वर्तमान में नगर निगम शहर को 85 एमजीडी पानी सप्लाई कर रहा है जबकि गर्मियों में इसका डिमांड 115 एमजीडी तक पहुंच जाती है। कजौली वाटर वर्क्स से 29 एमजीडी अतिरिक्त पानी आने की उम्मीद से लोगों को हर बार दिलाया दिया जाता था। आखिरकार यह सपना भी निगम ने पूरा कर ही दिया है।  

पाइप लाइन बिछाने में खर्च हुए 200 करोड़ रुपये
कजौली से चंडीगढ़ की दूरी 26 किलोमीटर है, जबकि जंडपुर से सेक्टर-39 के वाटर वर्क्स की दूरी छह किलोमीटर है। कजौली से जंडपुर तक गमाडा ने पाइप लाइन बिछाई है, जबकि जंडपुर से लेकर सेक्टर-39 के वाटर वर्क्स तक चंडीगढ़ नगर निगम ने पाइप लाइन डाली है। पंप हाउस, पाइप लाइन, जंडपुर में जमीन खरीदने और पाइपलाइन बिछाने पर लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। जंडपुर में चार एमजीडी क्षमता का टैंक बनाया गया है। सेक्टर-39 के वाटर वर्क्स में दो-दो एमजीडी क्षमता की दो अंडरग्राउंड टैंक बनाए गए हैं।

पाइप के रखरखाव के लिए करोड़ों रुपये गमाडा को देता है निगम
कजौली वाटर वर्क्स पर मशीनों और पाइप लाइन के रखरखाव के लिए नगर निगम हर माह गमाडा को 1.6 करोड़ रुपये देता है। वहीं पंप चलाने के लिए मासिक बिजली बिल के रूप में 2.5 करोड़ रुपये का भुगतान होता है। इतने रुपये खर्च होने के बावजूद लीकेज की समस्या बनी ही रहती है।
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पानी स्टोरेज का विकल्प नहीं

कुछ दिन पूर्व जब चारों फेज से पानी सप्लाई ठप हो गई थी तो पूरे शहर में हाहाकार मच गया था। नगर निगम ने टैंकरों से पानी की समस्या को हल करने का प्रयास किया, लेकिन यह संभव नहीं हो सका। उस दौरान पानी स्टोरेज का विकल्प न होना निगम को अखर गया। बड़ा सवाल यह है कि कभी भी कोई समस्या हो जाए तो शहर को आधे दिन भी पानी सप्लाई करने के लिए निगम के पास कोई विकल्प नहीं है।

शहर को अतिरिक्त पानी देने का मेरा लक्ष्य था। इस लक्ष्य को लगभग पूरा कर लिया है। अब लोगों को पानी की किल्लत की समस्या से नहीं जूझना पड़ेगा। यह मेरे लिए और शहरवासियों के लिए बड़ी खुशी की बात है।
- केके यादव, नगर निगम कमिश्नर
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