पानी के इंतजार में खड़ी महिलाएं
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महिलाएं चिलचिलाती धूप में घरों से बर्तन लेकर दोपहर 12 बजे से खेतों की ओर चल पड़ती हैं। सिंचाई के लिए डाली गई पाइप लाइन में लगे एक नल पर पहुंचती हैं। हालांकि शाम चार बजे पानी आना शुरू होता है और महिला शाम सात बजे तक यहां से पानी भरती हैं।
रामगढ़ की महिलाओं को तपती दोपहरी में भी आराम नहीं मिलता है। क्योंकि उनको अपनी व परिवार की प्यास बुझानी है तो गांव से एक किमी दूर खेतों में लगे नलकूप से चार घंटे खड़े रहकर पानी लाना पड़ता है। इसके अलावा गांव में दूसरा कोई पानी का साधन नहीं है। नलकूप के सहारे पूरे गांव को पानी मिलता है और उसमें भी खारा पानी आता है। जिसे पीना भी मुश्किल है लेकिन लोगों को मजबूरी में वह पानी पीना पड़ता है।
डेढ़ साल पहले खराब हुआ ट्यूबवेल
रामगढ़ में सरकार ने कई साल पहले एक ट्यूबवेल लगवाया था, जिससे गांव के लोगों को पानी मिल सके। वह ट्यूबवेल डेढ़ साल पहले भू-जल स्तर नीचे जाने के कारण ठप हो गया था। उसके बाद से सरकार व अधिकारियों ने गांव की कोई सुध तक नहीं ली, जबकि गांव के लोग कई बार समस्या को लेकर अधिकारियों के पास जा चुके हैं।