ऊपर की मंजिलों में रहने वाले शहरवासियों को फुल प्रेशर से पानी पहुंचाने के लिए निगम ने नया प्लान बनाया है। जिसके तहत सुधार के कई दावे किए गए। लेकिन इसके बावजूद शहर में पानी की किल्लत बरकरार है। मेयर अरुण सूद ने 26 अप्रैल को जन स्वास्थ्य विभाग के सभी अधिकारियों के साथ बैठक नए सिरे से प्लानिंग की थी।
जिसके तहत अब शहरवासियों को सुबह और रात साढ़े आठ बजे तक ही पानी मिलता है। कई एरिया के लोगों का कहना है कि ग्राउंड फ्लोर पर पानी 8 से सवा 8 बजे ही चला जाता है। जबकि ऊपर के फ्लोर में पानी चढ़ता भी नहीं है। ऊपर की मंजिलों में फुल प्रेशर से पानी पहुंच सके, इसके लिए सेक्टर-39 वाटर वर्क्स से पानी की सप्लाई के लिए रात को ढाई बजे पंपिंग शुरू कर दी है। अब पंपिंग इसलिए शुरू की गई है ताकि लोगों के घर की छतों पर रखी टंकियों तक सुबह उनके उठने से पहले पानी पहुंच जाए।
अभी साढ़े तीन बजे प्रमुख वाटर वर्क्स से पंपिंग शुरू होती थी। लेकिन शहरवासियों को इस प्लानिंग का भी फायदा नहीं मिल रहा है। लोगों का कहना है कि अभी यह हाल है तो स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में किस तरह 24 घंटे पानी मिलेगा। यह एक पहेली है।
किस किस एरिया में सबसे ज्यादा दिक्कत: सेक्टर-7, 18, 20, 21, 22, 24, 25, 26, 27, 29, 30, 32, 37, 38, 39, 40, 42, 44, 45, 47, 49, 52 और 61 में लगातार पानी के लो प्रेशर की दिक्कत है। साथ ही मनीमाजरा, धनास, बापूधाम, मलोया और गांव के एरिया में पानी के किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। लोगों को ग्राउंड फ्लोर या खुद मेहनत करके पानी चढ़ाना पड़ रहा है या फिर मोटर लगाई है, जिससे बिजली का खर्च बढ़ गया है।
लगातार आ रही हैं शिकायतें : बिट्टू
फॉसवेक चेयरमैन बलजिंदर सिंह बिट्टू का कहना है कि पूरे शहर में पानी का बुरा हाल है। शहर की कई आरडब्ल्यूए उन्हें लो प्रेशर की शिकायत कर चुकी हैं। उनका कहना है कि सुबह जब पानी की दिक्कत होती है तो जन स्वास्थ्य विभाग का कोई अधिकारी फोन भी नहीं उठाता है।
अधिकारियों को फर्क नहीं पड़ता: सेक्टर-18 की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील चोपड़ा का कहना है कि एरिया में पानी की भारी किल्लत है। ऊपर की मंजिलों में तो पानी चढ़ता ही नहीं है। अधिकारियों को शिकायत करने के बावजूद भी कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।
चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद का कहना है कि पानी की कमी नहीं है। रोजाना सुबह अलग अलग टीमें शहर में पानी का प्रेशर चेक करने के लिए जा रही हैं। जहां से भी शिकायतें मिलती हैं, दूर कर दी जाती हैं। पानी बर्बाद करने वालों के खिलाफ निगम ज्यादा सख्त है।