लाखों लोगों का अपना आशियाना होने का सपना पूरा होने जा रहा है। सरकार ने बड़ा फैसला लिया है और इसकी घोषणा भी कर दी है। सालों से स्थानीय निकायों की जगह पर किराएदार चले आ रहे लोग अब उस जगह के मालिक बन सकेंगे।
इसके लिए स्थानीय निकाय विभाग ने पंजाब यूनिसिपैलिटी (वेस्टिंग ऑफ प्रॉपर्टी राइट्स) स्कीम-2016 नोटिफाई की है। पर इसका फायदा सिर्फ उन लोगों को ही मिलेगा, जो बीस साल से ज्यादा समय से किराएदार चले आ रहे हैं।
नगर निगमों, काउंसिलों व पंचायतों की जमीनों पर पंजाब में लाखों लोग सालों से किराएदार चले आ रहे हैं। जिनसे स्थानीय निकायों को मामूली किराया आता है। इनसे संबंधित हजारों केस सरकार अदालतों में लड़ रही है। जिसमें पैसा और समय बर्बाद हो रहा है।
भाजपा मीडिया सेल के पूर्व कन्वीनर सुनील सिंगला ने यह मुद्दा स्थानीय निकायमंत्री अनिल जोशी के पास उठाया था।
काफी स्टडी और सलाह के बाद लिया फैसला
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- फोटो : डेमो फोटो
काफी स्टडी और अधिकारियों से सलाह के बाद जोशी ने बीस साल से ज्यादा पुराने किराएदारों को वही जगहें बेचने का फैसला किया है। इससे जहां निकायों को काफी आय होगी। वहीं, प्रॉपर्टी लोगों को नाम होने के बाद निकाय उस पर प्रॉपर्टी टैक्स भी वसूल सकेंगे।
साथ ही कोर्ट केस भी खत्म हो जाएंगे। जोशी ने बताया कि इसके लिए किराएदारों को तीन माह के अंदर आवेदन देना होगा। साथ ही उन्हें निकाय विभाग द्वारा तय की गई दरों के मुताबिक भुगतान भी करना होगा। साथ ही जगह पर कब्जे के सबूत देने होंगे।
जगह का रकबा निगम सीमा में डेढ़ सौ वर्ग गज और काउंसिल व पंचायत के केस में दो सौ वर्ग गज तक होगा। लेटर ऑफ इंटेंट जारी होने के तीस दिनों के अंदर एक चौथाई रकम भरनी होगी।
बाकी की रकम वे तीन बराबर ब्याज रहित सालान किस्तों में दे सकेंगे। अगर कोई तीस दिनों में पूरी रकम अदा करना चाहता है तो उसे पांच फीसदी की छूट मिलेगी। अगर समय पर किस्तें न दी गईं तो बारह फीसदी ब्याज भी देना पड़ेगा।