कोरोना के चलते सात महीने से रुके जिला बार एसोसिएशन के चुनाव गुरुवार को संपन्न हुए। इस दौरान 2749 वकीलों में से 1506 वकीलों ने 5 पदों पर 12 प्रत्याशियों के लिए मत डाले। हालांकि चुनाव के परिणाम अभी घोषित नहीं होंगे क्योंकि मामला उच्च अदालत में लंबित है। उच्च अदालत के फैसले के बाद ही चुनाव का परिणाम आएगा।
कोरोना के कारण अधिकतर वकीलों ने अदालत आना शुरू नहीं किया है। इसका प्रभाव चुनाव में देखने को मिला है। प्रशासन ने वकीलों की सुरक्षा के लिए पूरे इंतजाम किए थे। सभी एंट्री गेट पर पुलिस तैनात रही। पुलिस की सहायता से एक-एक वकील को मतदान के लिए भेजा गया। महिला पुलिसकर्मी भी मौके पर मौजूद रहीं। चुनाव की पारदर्शिता और निष्पक्षता के लिए दो बड़ी स्क्रीन भी लगाई गई, जहां पर केंद्रों का पूरा दृश्य देखने को मिला। सभी प्रत्याशियों के समर्थकों ने वोट के लिए पूरे जोश के साथ प्रचार किया।
चुनाव केंद्र के बाहर उड़ीं नियमों की धज्जियां
शहर में दो दिन से कोरोना के मामले लगातार बढ़े हैं। बार चुनाव के दौरान भी मतदान केंद्र के बाहर जमा वकीलों की भीड़ ने सामाजिक दूरी की जमकर धज्जियां उड़ाईं। वहीं मतदान केंद्र के अंदर कोरोना से बचाव के लिए सभी नियमों का पालन किया गया। परिसर में जमा भीड़ में कई लोग बिना मास्क के भी नजर आए। ऐसी लापरवाही सामाजिक दूरी का पालन कर रहे वकीलों को भी खतरे में डाल सकती है।
चुनाव से एक दिन पहले अध्यक्ष पद के प्रत्याशी एडवोकेट भाग सिंह सुहाग ने उच्च अदालत में याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि एसोसिएशन के 69 मतदाता ऐसे हैं, जिनकी लंबित राशि को पिछली कार्यकारिणी ने नियमों के खिलाफ जाकर माफ कर दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब अपने स्वार्थ के लिए किया गया।
भाग सिंह की याचिका पर उच्च अदालत ने निर्देश दिए कि इन 69 वकीलों के मत डलवा लिए जाएं लेकिन चुनाव के परिणाम उच्च अदालत के अगले फैसले तक घोषित नहीं किए जाएंगे। 9 नवंबर को होने वाली सुनवाई के बाद ही यह तय होगा कि बार चुनाव के परिणाम कब घोषित किए जाएंगे।
बार एसोसिएशन की सदस्यता के बिना मत डालने आया पकड़ा
चुनाव के दौरान एक व्यक्ति को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उस पर आरोप था कि वह बार एसोसिएशन का सदस्य नहीं है, लेकिन वह वोट के लिए मतदान केंद्र में पहुंच गया। हालांकि पुलिस ने आरोपी को पूछताछ कर छोड़ दिया। पुलिस का कहना है कि सेक्टर-48 निवासी आरोपी के खिलाफ वकीलों की तरफ से कोई भी शिकायत नहीं आई है इसलिए उसे हिरासत में नहीं रखा जा सकता। सूत्रों के मुताबिक कुछ वकीलों में हाथापाई भी हुई, जिसे वरिष्ठ वकीलों ने हस्तक्षेप कर सुलझा दिया।