हरियाणा में पहली विधानसभा के मुकाबले 12वीं विधानसभा में चार गुना मतदाता बढ़ चुके हैं, लेकिन महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत कभी बढ़ नहीं सका।
ताज्जुब की बात यह है कि तीसरी विधानसभा यानी 1972 में जितने प्रतिशत महिलाओं ने वोट किया था, वो 12वीं लोकसभा तक भी रिकार्ड है, जो कि महज 47.13 प्रतिशत ही था।
यहां तक कि वर्ष 2014 की मोदी लहर भी प्रदेश में महिलाओं का मतदान प्रतिशत बढ़ाने में कोई कमाल नहीं कर सकी। यह हालत तब है कि जबकि पहली विधानसभा के मुकाबले प्रदेश में मतदाताओं की संख्या एक करोड़ से अधिक बढ़ी है।
अब 13वीं विधानसभा का मतदान 21 अक्तूबर को है और साढ़े 27 लाख महिला वोट बढ़े हैं। अब देखना होगा कि महिला शक्ति को इसी दिन मतदान केंद्रों तक लाने में चुनाव आयोग कितना कामयाब होता है।
महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत 11वीं विधानसभा में रहा सबसे कम
प्रदेश में महिलाओं को वोटिंग प्रतिशत अब तक जितनी विधानसभा के चुनाव हुए, उनमें 11वीं विधानसभा में सबसे कम 45.44 रहा है। इस मतदान प्रतिशत में 12वीं विधानसभा में महज 0.6 की बढ़ोतरी हुई। इसकी एक वजह हरियाणा में कम लिंगानुपात भी है।
- 2019 में साढ़े 27 लाख महिला वोट बढ़े पिछले वर्षों में 2740410 लाख महिला वोट बढ़े हैं। 13वीं विधानसभा के चुनाव में 8465152 महिलाएं वोट देंगी, जबकि 12वीं विधानसभा में इनकी संख्या 5724742 थी