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विसरा रिपोर्ट आने में लगते हैं दो महीने, सैकड़ों रिपोर्ट्स लटकीं

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चंडीगढ़। छह वर्षों में शहर में संदिग्ध परिस्थितियों में 929 शव बरामद हो चुके हैं। इनमें से ज्यादातर मामलों में अभी भी मौतों का खुलासा नहीं हो सका है। सूत्रों के अनुसार विसरा रिपोर्ट आने में दो महीने से भी ज्यादा का वक्त लग जाता है। आला अधिकारियों के अनुसार इसकी एक वजह यह भी है कि सेक्टर 36 स्थित फोरेंसिक लैब शहर की एकलौती लैब है जिसमें देश के कई राज्यों से विसरा आते हैं। सुसाइड, एक्सीडेंट, जहर खुरानी समेत संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने वाले शव पर पुलिस केस में पोस्टमार्टम रिपोर्ट लगा देती है और साथ ही विसरा सुरक्षित रखने की बात लिख देती है। विसरा को जांच के लिए तीस दिन के अंदर फोरेंसिक लैब भेजा जाता है। वहीं पुलिस आला अधिकारियों का कहना है कि कोर्ट में तारीख लगने पर लैब से विसरा रिपोर्ट मंगवा ली जाती है। जिसके आधार पर पुलिस कोर्ट में फाइल पेश करती है।
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कुछ ही केसों में समय पर मिलती है रिपोर्ट
सेक्टर-36 में शहर की एक मात्र फोरेंसिक लैब स्थित है। इस लैब में चंडीगढ़ समेत अन्य जगहों से भी केस आते हैं। इनमें कुछ ही मामलों में रिपोर्ट समय पर मिलती है बाकी बचे ज्यादातर मामलों में रिपोर्ट आने में बहुत ज्यादा समय लग जाता है।
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