पीजीआई के जनरल वार्ड और इमरजेंसी इतने ज्यादा वायरसग्रस्त हैं कि यदि कोई भी मरीज 15 दिन तक एडमिट रहा तो उसे फंगल होने की संभावना रहती है।
यदि समय पर इसका पता नहीं लगाया गया तो इसका इलाज थोड़ा मुश्किल होता है। फंगल इंफेक्शन उन मरीजों में सबसे ज्यादा होने की आशंका रहती है, जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, या फिर जरूरत से ज्यादा एंटीबायोटिक व स्टरायड लेते हैं।
यह बात पीजीआई के हिस्टोपैथोलॉजी विभाग के प्रोफेसरों ने आयोजित प्रेस वार्ता में किया। उन्होंने बताया कि एस्परजिलस नामक वायरस पर्यावरण में रहता है और शरीर कमजोर होने पर अटैक कर देते हैं।
यह लीवर व ब्रेन को प्रभावित करता है। पीजीआई में मरीजों की संख्या ज्यादा है और गंभीर बीमारियों से पीड़ित होते हैं। जनरल वार्ड व इमरजेंसी में भी यही स्थिति है।
सभी मरीज एक दूसरे के काफी करीब रहते हैं। ऐसे में फंगल इंफेक्शन के काफी चांस रहते हैं। पीजीआई के हिस्पैथोलॉजी के प्रोफेसरों ने बताया कि उन्होंने बताया कि जब भी जांच के दौरान फंगल के बारे में पता चलता है तो इसकी सूचना रिपोर्ट तैयार होने से पहले डाक्टरों को फोन पर दे दी जाती है।
ऐसे रुक सकता है फंगल इंफेक्शन
1. अस्पताल को साफ-सुथरा रखना होगा
2. जरूरत से ज्यादा एंटीबायोटिक नहीं लेना चाहिए
3. अस्पताल में मरीजों की संख्या निर्धारित होनी चाहिए
4. बीमारी के दौरान खान-पान का ध्यान रखना होगा
5. स्टराइड नहीं लेना चाहिए