हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने कहा है कि फरवरी में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान रोहतक में उनके घर, स्कूल और अन्य प्रतिष्ठानों को आगजनी व हिंसा के हवाले करना आरक्षण आंदोलन की आड़ में रचा गया एक राजनीतिक षड्यंत्र था।
उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी और प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर व पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से सवाल किया कि वे आंदोलन के दौरान कांग्रेस की भूमिका पर मौन क्यों हैं? वे राहुल गांधी, जो जरा सी बात पर किसी भी घटनास्थल पर पहुंच जाते थे, वे हरियाणा के जलने पर मौन क्यों रहे। कैप्टन अभिमन्यु ने वीरवार को अपने आवास पर प्रेस कांफ्रेंस में यह सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे जांच के दौरान साक्ष्य व प्रमाण सामने आ रहे हैं, उनसे आंदोलन को लेकर रची गई राजनीतिक साजिश का खुलासा हो रहा है। उन्होंने कहा कि जो लोग जांच के दायरे में आए हैं, उनका एक राजनीतिक दल और उस दल में भी एक विशेष गुट के साथ सीधा संबंध है।
उन्होंने कहा कि सुदीप कलकल को कांग्रेस पार्टी एक राजनीतिक पासे के रूप में फेंकने का काम कर रही है, जबकि सुदीप कलकल पूर्व मुख्यमंत्री के प्रतिष्ठान में मैनेजर रहा है। उसकी पत्नी को भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय खानपुर कलां में प्राध्यापक के पद पर नौकरी और उनकी सास को उपभोक्ता अदालत, सोनीपत का सदस्य भी पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान मनोनीत किया गया था।
कैप्टन अभिमन्यु ने माना कि पुलिस व प्रशासनिक स्तर पर कुछ नाकामियां रहीं, लेकिन सरकार ने प्रकाश सिंह कमेटी का गठन किया है, जो तथ्यों का पता लगा रही है और रिपोर्ट आने पर महानिरीक्षक से लेकर सिपाही तक के रैंक के कर्मचारी और प्रशासनिक स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई करने से सरकार नहीं हिचकिचाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा पूरी ईमानदारी से जनता के सामने तथ्यों को उजागर करना है। न्यायिक जांच आयोग का भी गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि हिंसा व आगजनी के दौरान मारे गए निर्दोष व्यक्तियों और हजारों लोगों के घरों, दुकानों व प्रतिष्ठानों को हुए नुकसान का उन्हें बेहद दुख है। उनकी संवेदना व सद्भावना उनके साथ हैं, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों।