फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जाट आरक्षण आंदोलन की आड़ में हिंसा राजनीतिक षड्यंत्र: अभिमन्यु

Fri, 22 Apr 2016 01:44 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
कैप्टन अभिमन्यु - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने कहा है कि फरवरी में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान रोहतक में उनके घर, स्कूल और अन्य प्रतिष्ठानों को आगजनी व हिंसा के हवाले करना आरक्षण आंदोलन की आड़ में रचा गया एक राजनीतिक षड्यंत्र था।
विज्ञापन


उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी और प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर व पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से सवाल किया कि वे आंदोलन के दौरान कांग्रेस की भूमिका पर मौन क्यों हैं? वे राहुल गांधी, जो जरा सी बात पर किसी भी घटनास्थल पर पहुंच जाते थे, वे हरियाणा के जलने पर मौन क्यों रहे। कैप्टन अभिमन्यु ने वीरवार को अपने आवास पर प्रेस कांफ्रेंस में यह सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे जांच के दौरान साक्ष्य व प्रमाण सामने आ रहे हैं, उनसे आंदोलन को लेकर रची गई राजनीतिक साजिश का खुलासा हो रहा है। उन्होंने कहा कि जो लोग जांच के दायरे में आए हैं, उनका एक राजनीतिक दल और उस दल में भी एक विशेष गुट के साथ सीधा संबंध है।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि सुदीप कलकल को कांग्रेस पार्टी एक राजनीतिक पासे के रूप में फेंकने का काम कर रही है, जबकि सुदीप कलकल पूर्व मुख्यमंत्री के प्रतिष्ठान में मैनेजर रहा है। उसकी पत्नी को भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय खानपुर कलां में प्राध्यापक के पद पर नौकरी और उनकी सास को उपभोक्ता अदालत, सोनीपत का सदस्य भी पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान मनोनीत किया गया था।

कैप्टन अभिमन्यु ने माना कि पुलिस व प्रशासनिक स्तर पर कुछ नाकामियां रहीं, लेकिन सरकार ने प्रकाश सिंह कमेटी का गठन किया है, जो तथ्यों का पता लगा रही है और रिपोर्ट आने पर महानिरीक्षक से लेकर सिपाही तक के रैंक के कर्मचारी और प्रशासनिक स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई करने से सरकार नहीं हिचकिचाएगी।

उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा पूरी ईमानदारी से जनता के सामने तथ्यों को उजागर करना है। न्यायिक जांच आयोग का भी गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि हिंसा व आगजनी के दौरान मारे गए निर्दोष व्यक्तियों और हजारों लोगों के घरों, दुकानों व प्रतिष्ठानों को हुए नुकसान का उन्हें बेहद दुख है। उनकी संवेदना व सद्भावना उनके साथ हैं, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों।
विज्ञापन

कैप्टन ने गिनाए कई आरोपियों के नाम

वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु - फोटो : फाइल फोटो
कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि जांच के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार रहे प्रो. वीरेंद्र सहित जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें महेंद्र हुड्डा के बारे में पूर्व मुख्यमंत्री बताएं कि उनके उनसे क्या संबंध हैं। इसी तरह, गौरव बुधवार का कांग्रेस प्रवक्ता कृष्णमूर्ति हुड्डा से क्या संबंध है। कैप्टन अभिमन्यु ने बताया कि जसिया गांव के सोमबीर व जसबीर, जो दस वर्षों तक रोहतक के सांसद के सुरक्षा कर्मी के रूप में तैनात रहे।

इसके अलावा, जोगिन्द्र जोगा जो महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ से जुड़ा है, वह प्रो. वीरेंद्र के गांव का है। उन्होंने कहा कि एक विशेष विधानसभा क्षेत्र से 80 प्रतिशत से अधिक लोग अचानक आरक्षण आंदोलन से जुड़ जाते हैं, जबकि प्रदेश में कई वर्षों से चल रहे जाट आरक्षण आंदोलन के संगठनों से उनका कोई नाता नहीं था। उन्होंने हैरानी जताई कि झज्जर व बेरी में आगजनी व हिंसा की घटनाएं हुईं, लेकिन बहादुरगढ़ व बादली में कुछ नहीं हुआ।

इसी तरह कलानौर व महम में घटनाएं हुईं। उन्होंने सवाल किया कि खरखौदा, गोहाना व गन्नौर के जनप्रतिनिधियों की आंदोलन में क्या भूमिका थी? पूर्व विधायक बीबी बत्तरा और राहुल जैन के संबध क्या हैं? सुदीप कलकल व राहुल जैन की 18 फरवरी, 2016 को 35 बिरादरी व धरने पर बैठे वकीलों के झगड़े में क्या भूमिका थी? राहुल जैन आज भी कांग्रेस नेताओं से बात करता है।

'संकेत मिल रहे हैं, कौन था षड्यंत्र के पीछे' : कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि यह कांग्रेस का ऐसा षड्यंत्र था, जिसे देखकर रूह कांप जाती है। कांग्रेस को इसके लिए कभी सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक व लोकतांत्रिक स्तर पर माफ नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि आंदोलन की आड़ में षड्यंत्र की पटकथा लिखने के पीछे कौन रहा, इसके संकेत सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायक कुलदीप शर्मा, सुदीप कलकल का नाम भाजपा से जोड़कर उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली कहावत चरितार्थ कर रहे हैं, जबकि भाजपा का कलकल से कभी कोई लेना-देना नहीं रहा। उन्होंने कहा कि एफआईआर व जांच प्रक्रिया से तथ्य सामने आ रहे हैं कि आंदोलन के तार कहां से जुड़े थे।

भावुक हो गए कैप्टन, आंखे हुईं नम: रोहतक में जिस दिन कैप्टन अभिमन्यु के घर पर उपद्रवियों ने हमला कर आगजनी की, उस दिन कैप्टन अभिमन्यु चंडीगढ़ में अमर उजाला के हरियाणा एमएसएमई कानक्लेव-2016 में उपस्थित थे। उससे पहले दिन में वे एक मीटिंग में व्यस्त रहे। इस व्यस्तता के बीच वे रोहतक से अपनी पत्नी की ओर से करीब 20 बार किए गए फोन को भी नहीं सुन सके। इसी दौरान उनके बच्चों ने भी मोबाइल पर उनसे बात करने का प्रयास किया था। यह सारी बातें कैप्टन अभिमन्यु ने वीरवार को अपने आवास पर प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करने के बाद एक अनौपचारिक वार्तालाप के दौरान कहीं।

अपने पुरखों की यादों और वस्तुओं को समेटे हुए घर के पूरी तरह जल जाने का दर्द उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था। बातों-बातों में वे आगजनी की घटना को विस्तार से बयां करने लगे। कैप्टन ने बताया, वे घर से बार-बार आ रहे फोन नहीं सुन पाए तो उनके दो करीबी लोग चंडीगढ़ पहुंचे और उन्होंने हालात की जानकारी दी। उसके बाद घर से फोन आया तो मोबाइल पर यही सुनाई दिया कि दोनों ओर के कमरों में आग लगी हुई है और सारा परिवार बीच के गलियारे में फंसा है, जहां से निकलना मुश्किल है और धुआं भर रहा है।

इतना सुनकर मैं खुद को संभाल नहीं पाया और वहीं सोफे पर बैठ गया। कैप्टन इतना कहकर रुआंसे हो गए, उनकी आंखें नम हो आईं। कुछ देर के लिए कमरे में सन्नाटा छा गया। शायद सभी ने उस भय को अपने भीतर महसूस किया, जिसे कैप्टन अभिमन्यु ने अपने परिजनों को मौत के करीब पाकर महसूस किया था। कैप्टन कुछ देर खामोश बैठे रहे। सबने देखा कि वे खुद को संभाल रहे थे।

फिर उन्होंने बताया कि उनका परिवार जिस जगह फंसा था, उसके पीछे का दरवाजा 12 साल से कभी नहीं खोला गया था। उन्होंने कहा कि उपद्रवियों ने घर में खड़ी कार को आग लगा दी और अंदर घुसकर उनके परिवार को मार डालने वाले थे कि जलती कार में धमाका हो गया और वे जब तक घर में घुसते, पड़ोसियों ने बंद दरवाजा तोड़कर उनके परिवार को बचा लिया। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें