मंच पर एक कलाकार अपनी लाजवाब नाट्य कला से सबका दिल जीत लेती है। पंजाब कला भवन सेक्टर-16 में दूसरे दिन गुरशरण सिंह नाट उत्सव के दौरान नटी बिनोदिनी का मंचन किया गया। यह नाटक 1874 के दौरान बंगाल के थिएटर पर आधारित रहा। अपनी छवि सुधारने के लिए एक वेश्या थिएटर में आती है... और जब वह थिएटर छोड़ती है तो यह कहकर जाती है कि थिएटर भी पाक नहीं।
नाटक शुरू होता है लड़की विनोदिनी से, जो एक वेश्या है। वह कोलकाता के बंगाली थिएटर में पहुंच जाती है। थिएटर में वह 12 साल तक काम करती है। इसके बाद थिएटर छोड़ देती है। यह वेश्या थिएटर में इसलिए आती है, क्योंकि उसको लगता है कि उसका कलंक मिट जाएगा। लेकिन, उसको सहयोगी आर्टिस्ट मंच से उतरने के बाद वेश्या ही मानते हैं।
नाटक की कहानी में राजा बाबू नाम के एक नौजवान को दिखाया गया है जो कि विनोदिनी से प्यार करता है। राजा बाबू जमींदार है और किसी और से शादी रचा लेता है। उधर, दिखाया जाता है कि बंगाल के थिएटर नीलाम हो रहे हैं। एक थिएटर जिसका नाम स्टार थिएटर होता है बचाने के लिए गुरमुख सेठ नाम का एक व्यक्ति उनके पास आता है।
वह कहता है कि यदि नटी को उनकी रखैल बना दें तो थिएटर को नीलामी से बचाने के लिए वह पचास हजार रुपये दे देगा। वह लड़की थिएटर बचाने के लिए मान जाती है। नाटक के अंत में विनोदिनी के यह डायलाग कि थिएटर में भी सदाचार नहीं है। यहां भी मानवता नहीं है।
नाटक में यह रहे आर्टिस्ट
नटी विनोदिनी की भूमिका में अनीता शब्दीश ने बेहतरीन अभिनय किया है। उन्होंने नटी विनोदिनी के डायलाग में जान डाल दी। इस नाटक का निर्देशन भी अनीता शब्दीश ने किया। स्टार थिएटर के निर्देशक के रूप में गिरीश घोष की भूमिका निभाई सनी गिल ने। राजाबाबू की भूमिका हरमन पाल सिंह और गुरमुख सेठ की भूमिका तेजभान गांधी ने निभाई।