हरियाणा में राजनीतिक हालात तेजी से बदल रहे हैं। एक तरफ कांग्रेस के दिग्गज कुमारी सैलजा, चौधरी बीरेंद्र सिंह और अवतार भड़ाना मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर सीधा हमला बोल रहे हैं तो दूसरी तरफ भाजपा-हजकां गठबंधन टूटने की संभावना बढ़ती जा रही है। इस सप्ताह हरियाणा की राजनीति नई करवट लेने जा रही है। कांग्रेस छोड़कर अलग हुए मुख्यमंत्री के निकटतम मित्र पूर्व केंद्रीय मंत्री विनोद शर्मा अपनी नई पार्टी की घोषणा करने जा रहे हैं। उनकी पार्टी सभी 90 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
अमर उजाला के साथ विशेष बातचीत
चंडीगढ़ स्थित आवास पर विनोद शर्मा ने रविवार को अमर उजाला के साथ विशेष बातचीत में अपनी आगामी राजनीति का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि वे 53 विस क्षेत्रों में दफ्तर खोल लिए हैं। बाकी बचे 37 क्षेत्रों में दफ्तर खोले जाएंगे। उन्होंने चुनाव आयोग के पास आवेदन कर रखा है। आयोग ने पार्टी का नाम लगभग तय कर दिया है।
इस समय सूबे में पार्टी का सदस्यता अभियान जारी है। सबसे पहले पार्टी की घोषणा, उद्देश्य और हरियाणा के लिए क्या करने वाले हैं, के बारे में घोषणा की जाएगी। पार्टी का ऐलान एक सप्ताह के भीतर कर दिया जाएगा। उसके बाद प्रदेश, लोकसभा, जिला, विधानसभा, खंड और बूथ स्तर की कार्यकारिणी घोषित की जाएंगी।
पार्टी वर्करों से पूछकर तय करेंगे उम्मीदवार
शर्मा ने बताया कि वे पार्टी वर्करों से पूछकर विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार तय करेंगे। वे प्रदेश के 452 गांवों में पहले ही जा चुके हैं, मगर पार्टी गठित होने के बाद संगठन मजबूत करने के लिए वे लोकतांत्रिक तरीके को अपनाते हुए जहां वर्कर कहेंगे, वहां जाएंगे। जनसंपर्क पर पूरा जोर दिया जाएगा।
नई पार्टी बनाकर सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ने का मकसद पाले हुए शर्मा से जब अमर उजाला ने पूछा कि अगर हजकां का गठबंधन भाजपा से टूट जाता है तो क्या वे (शर्मा) और कुलदीप बिश्नोई (हजकां) गठबंधन कर चुनाव लड़ सकते हैं? शर्मा ने कहा कि फिलहाल वे अपनी पार्टी घोषित करने जा रहे हैं। विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। भविष्य में क्या होगा उसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। आप (मीडिया) जो चाहे आकलन करें, स्वतंत्र है।
करनाल से चुनाव लड़ने के लिए राजनाथ सिंह ने की थी हां
शर्मा ने खुलासा किया कि हजकां अध्यक्ष कुलदीप बिश्नोई चार मार्च को उन्हें साथ लेकर भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह के पास लेकर गए थे। बिश्नोई ने राजनाथ सिंह से आग्रह किया था कि वे करनाल सीट से विनोद शर्मा को हजकां टिकट पर चुनाव लड़ाना चाहते हैं।
राजनाथ सिंह ने हां कर दी थी। उनकी हां के बाद पांच मार्च को गुड़गांव में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी थी, मगर भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने ट्विट कर दिया और मामला बिगड़ गया। बाद में बिश्नोई ने भी मजबूरी जता दी और वे हजकां में शामिल नहीं हुए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कभी भी भाजपा में शामिल होने की बात नहीं चलाई थी और न ऐसी योजना थी।
मैंने कांग्रेस के बारे में जो कहा था, सच निकला
शर्मा ने कहा कि उन्होंने गत 9 मार्च को कुरुक्षेत्र में कांग्रेस संगठन, कांग्रेस में कार्यकर्ताओं की सुनवाई न होने, कांग्रेस नेतृत्व चंद लोगों के बीच घिरने और कांग्रेस की दुर्गति के बारे में जो कहा था, लोकसभा चुनाव में वह सिद्ध हो गया। अब विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस की यह दुर्गति होने वाली है।
उन्होंने कहा कि उन्हें कांग्रेस नेतृत्व नजरअंदाज कर रहा था। वे आठ साल से केवल कांग्रेस के विधायक बने रहे, मगर चौधरी बीरेंद्र सिंह को हारने के बाद राज्यसभा और कुमारी सैलजा को लोकसभा चुनाव लड़वाने के बजाय राज्यसभा भेज दिया गया।
यह बिलकुल गलत था। कांग्रेस के नेताओं को उन्होंने लगातार कांग्रेस संगठन खत्म होने की बात बताई, मगर कोई संज्ञान नहीं लिया। इसलिए उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ दोस्ती पर शर्मा ने कहा कि यह कहां लिखा है कि दोस्ती तभी होगी, जब दोस्त एक ही पार्टी में होंगे।