पंजाब पुलिस व नशा तस्करों की मिलीभगत के चलते पाकिस्तान सीमा पर बसे पंजाब के सरहदी गांवों में नशे के चलते जहां पुरुषों की मृत्यु हो रही है, वहीं महिलाएं और नाबालिग बेटियां भी अब नशे की चपेट में आ रही हैं। नशे के चलते हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई गांवों में नाबालिग बेटियां अपने पैरों पर चलने में सक्षम नहीं रह गई हैं। इस आशय की याचिका दाखिल कर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से दखल देने की मांग की गई है साथ ही आरोप लगाया है कि मांगपत्र देने के बावजूद राज्य सरकार ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया।
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को याची के मांगपत्र पर जल्द से जल्द निर्णय लेने का आदेश दिया है। याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट जेएस बैंस ने बताया कि पंजाब में नशे का कारोबार पंजाब पुलिस के अधिकारियों की मिलीभगत से फैल रहा है। याची ने कुछ मीडिया रिपोर्टों के हवाले से अमृतसर के कुछ गांवों के बारे में जानकारी दी। याची ने बताया कि नशे की चपेट में आकर इन गांवों में पुरुषों की लगातार मृत्यु हो रही है। परिवार के मुखिया के न रहने पर उनकी विधवाएं व नाबालिग बच्चियां भी नशे की चपेट में आने लगी हैं।
पूर्वी पंजाब में भी नाबालिग लड़कियां नशे की चपेट में हैं। स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि नशे के कारण वे अपने पैरों पर चल फिर तक नहीं सकतीं। याची ने बताया कि उसने इस हालात से अवगत करवाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब सरकार को मांगपत्र भी दिया था। पुलिस की नाक तले नशे का कारोबार चल रहा है।
पुलिस अधिकारियों को बर्खास्त करन की मांग
मांगपत्र में एसएचओ से लेकर एसएसपी को तक को बर्खास्त करने की मांग की गई। ऐसा करने पर ही राज्य के पुलिस अधिकारियों के बीच संदेश जाएगा और वे नशे पर लगाम लगाने की दिशा में अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद अब पंजाब सरकार को आदेश दिया है वह याची के मांगपत्र पर जल्द निर्णय लेकर उचित आदेश जारी करे।