कुमार गौरव उर्फ सच्चा यादव ने बताया कि जब उन्हें गांव के हालात के बारे में पता चला तो वह गांव गए थे। जहां हर घर में किसी को त्वचा की दिक्कत है तो किसी को लीवर की समस्या है। ग्रामीण दूषित पानी से परेशान है। कुमार गौरव ने बताया कि तीन महीने में गांव में पानी की वजह से 35 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से 12 लोगों की जान कैंसर ने ली है।
उन्होंने कहा कि गांव के मेन रोड के पार इंडस्ट्री एरिया घोषित है। जहां एक व्यक्ति ने बड़ी कपड़ा फैक्टरी लगाई है। उस वक्त तो कपड़ा फैक्टरी के कारण कोई बोला नहीं लेकिन बाद में उक्त फैक्टरी मालिक ने डाइंग लगा दी। उसने कुछ जगह लेकर दो-दो फुट के गड्ढे खोद दिए और गंदा पानी उसमें डालना शुरू कर दिया। जब फिर लोग नहीं बोले तो उक्त फैक्टरी मालिक ने आठ एकड़ जगह खरीदी और सफेदे के पेड़ लगाने के साथ-साथ 10-10 फुट गहरे गड्ढे खोदकर पानी उसमें डालना शुरू कर दिया। इस कारण गांव का पानी गंदा होने लगा। लोगों के घरों में पीने का पानी गंदा और बदबूदार आने लगा। गांव के लोगों की फसलें भी खराब होने लगीं।
गांव के लोग नई सरकार बनने के बाद विधायक हरदीप सिंह मुंडियां के पास पहुंचे। मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्हें सिर्फ आश्वासन देकर भेज दिया गया। कुमार गौरव ने कहा कि उन्होंने इसकी शिकायत प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों से की। उन्होंने अपने तौर पर भी पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से पानी की गुणवत्ता और सारे टेस्ट करवाए। वहां से पानी के सारे सैंपल फेल हो गए। जो पानी के सैंपल प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी लेकर गए थे, उनकी रिपोर्ट ही नहीं आई। उल्टा फैक्टरी मालिक ने आठ एकड़ जगह की चारदीवारी करवाने के साथ-साथ कंटीली तारें लगा दीं। अब जब सुनवाई नहीं हुई तो प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रिपोर्ट की मांग की गई थी लेकिन अधिकारियों ने सिर्फ आश्वासन दिया है। अब अगर उनकी सुनवाई नहीं होगी तो वह गांव के लोगों के साथ मिलकर अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और एनजीटी तक पहुंचेंगे।
क्या बोले अधिकारी
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चीफ इंजीनियर प्रदीप गुप्ता ने कहा कि पानी के सैंपल गांव से लेकर भेजे गए हैं, प्रकिया चल रही है। उनके अधिकारी रिपोर्ट तैयार करने में जुटे हैं। जैसे ही रिपोर्ट पूरी तैयार हो जाएगी वैसे ही कार्रवाई जरूर की जाएगी।