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'पुलिस बताए, भाजपा नेता का बेटा जबरन मेरी कार का दरवाजा खोलकर क्या करना चाहता था?'

Tue, 08 Aug 2017 09:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Chandigarh stalking case
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मुझे समझ नहीं आ रहा है कि किडनैपिंग के प्रयास का क्या दायरा होता है। उन लोगों ने मेरी गाड़ी रुकवाकर पीछे की तरफ हाथ मारे, दरवाजा खींचा, जितना जोर लगा सकते थे, उतना लगाया। गाड़ी मैंने लॉक कर ली थी, इसलिए नहीं खुली। अब मेरा सवाल यही है कि कोई गाड़ी क्यों खुलवाना चाहेगा? वे करना क्या चाहते थे?
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अब चंडीगढ़ पुलिस मेरे बयानों को क्या समझती है तो यह उसके विवेक पर निर्भर करता है। कमजोर धारा लगाने के मुद्दे पर पीड़िता की ओर से पहली बार यह बयान आया है। पीड़िता के हौसले कितने बुलंद हैं, उसके उस बयान से अंदाजा लगा सकते हैं, जो उसने मीडिया वालों के चेहरा ढक कर बाइट देने पर कहा। पीड़िता का कहना है कि वह अपना मुंह क्यों छिपाए। चेहरा तो उन्हें छिपाना चाहिए, जिन्होंने ये हरकत की है। उसके बाद उसने बिना चेहरा ढके मीडिया को बयान दिया।

 यह पीड़िता हरियाणा के सीनियर आईएएस की बेटी है। जिसने शनिवार को हरियाणा भाजपा अध्यक्ष सुभाष बराला केबेटे विकास बराला और उसके दोस्त आशीष के खिलाफ शराब पीकर पीछा करने और छेड़खानी का मामला दर्ज कराया था।
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मैं अपना चेहरा क्यों ढंकू, आरोपियों को छिपाना चाहिए अपना मुंह

subhash brala son charged for molestation
पीड़िता के पिता सीनियर आईएएस ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि वह किसी भी हालत में अपनी शिकायत वापस नहीं लेंगे। वह किसी के दवाब में नहीं हैं। यह मामला उनकी बेटी से जुड़ा है।

वह एक पिता और एक अधिकारी होने का पूरा कर्त्तव्य निभाएंगे। उनके साथ न सिर्फ अधिकारी हैं बल्कि कई राजनेताओं ने भी मेरी कार्रवाई का समर्थन किया है। जब उनसे पूछा गया कि उन पर किसी तरह का दबाव तो नहीं है तो उनका जवाब था कि मेरे ऊपर किसी का भी कोई दबाव नहीं है। हालांकि सुबह एक जानकार ने मुझे सलाह दी कि इस मामले को रफा-दफा कर दो। जिस पर मैंने पर उन्हें जमकर लताड़ा। मैंने उनसे कहा कि मामला मेरी बेटी से जुड़ा है इसलिए मैं किसी भी हालत में पीछे नहीं जाऊंगा। मैं अपने तौर पर इस लड़ाई को अंत तक लड़ता रहूंगा।

अब भारत सरकार, सिस्टम की जिम्मेदारी है कि दोनों आरोपी लड़कों को सजा दिलवाए। कमजोर धारा लगाए जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि उन्हें चंडीगढ़ पुलिस और सिस्टम पर पूरा भरोसा है। इसका सुबूत यही है कि मेरी बेटी सुरक्षित है। यूटी पुलिस इतनी जल्दी नहीं पहुंचती तो मेरी बेटी के साथ कुछ भी हो सकता था। मैं भी पिछले 30 सालों से नौकरी कर रहा हूं। मुझे नहीं लगता कि ऐसे मामलों में कोई भी सिस्टम कार्रवाई को गलत रास्ते में लेकर जाएगी। सिस्टम काम कर रहा है और उसको मालूम है कि मामले में क्या कार्रवाई करनी है। जबकि, कमजोर धारा पर किए सवाल पर उन्होंने साफ जवाब दिया कि वह इस मामले में कोई भी राय नहीं देना चाहते।

थाने से ही जमानत देने पर सवाल

subhash brala son charged for molestation
थाने से ही जमानत देने पर सवाल
पहले तो यह केस जमानती धाराओं में दर्ज हुआ और उसकेबाद थाने से ही आरोपियों को जमानत दे दी गई। चंडीगढ़ पुलिस की इस कार गुजारी पर हर तरफ से सवाल उठ रहे हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब चंडीगढ़ पुलिस शराब पीकर वाहन चलाने वालों को गिरफ्तार करती है, तो उन आरोपियों को मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश करती है। नेताओं के लड़के फंसे तो उन्हें थाने से ही जमानत दे दी गई। 

हरियाणा पुलिस छेड़खानी के आरोपियों को कोर्ट में पेश करती है
हरियाणा पुलिस किसी भी आपराधिक मामले में थाने में जमानत नहीं लेती। छेड़खानी सहित अन्य मामलों के आरोपियों को सीधे कोर्ट में पेश करती है। यदि जमानती धारा का केस हो तो भी आरोपी कोर्ट में ही जमानत याचिका दायर करते हैं। पिछले दिनों हरियाणा के एक डीएसपी के खिलाफ भी छेड़छाड़ का केस दर्ज हुआ था, जिन्हें पुलिस से जमानत नहीं मिली। बल्कि कोर्ट में ही जमानत अर्जी लगानी पड़ी थी। इसके अलावा सड़क हादसे के केस में भी हरियाणा पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश करती है और वहां से मजिस्ट्रेट ही जमानत लेते हैं।

ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त करने की तैयारी
आरोपी का ड्राइविंग लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए बाकायदा एक प्रक्रिया है। चंडीगढ़ पुलिस संबंधित विभाग और कोर्ट में अर्जी देती है। उसकेबाद लाइसेंस को निरस्त कर दिया जाता है। सोशल मीडिया पर समाजसेवी गुरजसजीत सिंह ने एसएसपी ट्रैफिक से सवाल पूछा कि आखिर छेड़खानी के आरोपी का लाइसेंस क्यों नहीं निरस्त किया जा रहा। इस पर एसएसपी ट्रैफिक की ओर से जवाब आया कि लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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सांसद किरण खेर ने तोड़ी चुप्पी

सांसद किरण खेर - फोटो : File Photo
आईपीसी की धारा 365, 511 न लगाने पर हो रही किरकिरी
चंडीगढ़ पुलिस पर हर तरफ से आरोप लग रहे हैं कि केस दर्ज करने में कमजोर धाराएं लगाई गई हैं। सबसे ज्यादा किरकिरी किडनैपिंग के प्रयास की धारा (365, 511) न लगाए जाने के चलते हो रही है। यदि इन धाराओं के तहत मामला दर्ज होता तो थाने में जमानत नहीं दी जा सकती थी।
हल्की धारा लगाए जाने से आरोपियों को थाने से ही जमानत मिल गई। जबकि चंडीगढ़ पुलिस ने पहले किडनैपिंग के प्रयास का केस दर्ज करने की बात कही थी, लेकिन बाद में कहा कि पीड़िता के बयान के मुताबिक  धारा 341 (गलत तरीकेसे रोकना) लगा दी गई है।

सांसद किरण खेर ने तोड़ी चुप्पी
हाई प्रोफाइल प्रकरण केदूसरे दिन चंडीगढ़ की सांसद किरण खेर ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए ट्विटर पर इसकी निंदा की। खेर ने कहा कि ..चंडीगढ़ में जो लड़की केसाथ हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है। किसी केसाथ ऐसा नहीं होना चाहिए। महिलाओं की मर्यादा केसाथ राजनीति नहीं करनी चाहिए। यह ट्वीट सांसद ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी की प्रेस वार्ता के बाद किया। तिवारी ने भाजपा सांसद की ओर से कोई प्रतिक्रिया न आने पर तीखे प्रहार किए थे।

मामले की पीड़िता द्वारा 164 के बयान दर्ज करवाने के बाद पुलिस ने धारा 354 डी, 185 मोटर व्हीकल एक्ट केसाथ धारा 341 भी जोड़ी।  पीड़िता के बयान पर जो भी धारा बनती है, एफआईआर में उसी धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। इसके अलावा पुलिस कानूनी राय भी ले रही है।
सतीश कुमार, डीएसपी सेंट्रल चंडीगढ़ पुलिस
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