नगर निगम ने शहर के रिहायशी इलाकों में सिक्योरिटी गेट्स लगाने के लिए प्रशासन के वास्तुकार विभाग से मंजूरी लेकर पॉलिसी बनाने का निर्णय लिया है। इससे पहले सेक्टर-15 के रिहायशी इलाकों की सुरक्षा के लिए साल 2011 में आठ लाख रुपये खर्च कर जो गेट्स लगाए थे, वह अब जंग खा रहे हैं।
एक दिन भी यह गेट्स एरिया की सुरक्षा नहीं कर पाए, क्योंकि सिक्योरिटी गेट्स कौन चलाएगा इसकी कोई पालिसी नहीं बनी। अब नए सिरे से पार्षदों के दबाव के कारण सिक्योरिटी गेट्स लगाने के लिए पॉलिसी बनाने का निर्णय 31 जुलाई को हुई बैठक में लिया गया है। जबकि, सेक्टर-15 में सरकारी बजट से लगाए गए सिक्योरिटी गेट्स का किसी ने जिक्र नहीं किया। इसका एक कारण यह भी है कि वर्तमान पार्षदों और अधिकारियों को इसके बारे में जानकारी ही नहीं है।
साल 2011 में प्रशासन के वास्तुकार विभाग ने सेक्टर-15 के साथ 21 में भी गेट्स लगाने की मंजूरी दी थी, लेकिन जब सेक्टर-15 में गेट्स लग गए तो सेक्टर-21 के लोगों ने इसका विरोध किया था, क्योंकि गेट्स की लंबाई मात्र दो फुट की थी। सेक्टर-15 में कुल सात प्रवेश-निकास द्वार पर गेट्स लगाए गए हैं। साल 2011 में उस समय वार्ड की पार्षद अनुचतरथ थी।
सेक्टर-44 में गेट्स उखाड़ने से रेजिडेेंट्स नाराज
चंडीगढ़ की मेयर आशा जसवाल
- फोटो : File Photo
सेक्टर-44 में गेट्स उखाड़ने से रेजिडेेंट्स नाराज
नगर निगम के रोड विंग ने पिछले हफ्ते सेक्टर-44 से सिक्योरिटी गेट्स उखाड़ दिए, क्योंकि रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने बिना मंजूरी के लगा दिए थे। इस कारण शिकायत आने पर निगम ने इन्हें उखाड़ दिए। इस कार्रवाई से यहां के रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी नाराज हैं। लोगों का कहना है कि तीन साल से जब से यह गेट लगे थे, उसके बाद से इलाके में चोरी की वारदात नहीं हुई थी।
साल 2011 में नगर निगम ने सिक्योरिटी गेट्स लगा दिए थे, लेकिन नगर निगम चाहता था कि इन गेट्स को रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन चलाए। लेकिन एसोसिएशन ने निगम को कहा था कि जिस तरह से टायलेट के बाहर विज्ञापन लगाने की मंजूरी दी गई थी, उसी तरह से निजी कंपनियों को भी सिक्योरिटी गेट्स पर विज्ञापन लगाने की अनुमति दी जाए। नगर निगम ने ऐसा नहीं किया, इस कारण अभी जो गेट्स लगे हैं, उनका कोई फायदा नहीं है।
- सुरेंद्र शर्मा, सेक्टर-15 की एसोसिएशन के पदाधिकारी एवं फॉसवेक के मुख्य प्रवक्ता।
सेक्टर-15 में जो साल 2011 में गेट्स लगाए गए हैं उनका कोई फायदा नहीं है। प्रवेश और निकासी द्वार पर गेट्स लगाने का निर्णय ही ठीक नहीं है। इस समय सेक्टर-15 में जो गेट्स लगे हैं, उन्हें नगर निगम को उखाड़ देना चाहिए।
- राजबाला मलिक, वार्ड पार्षद एवं पूर्व मेयर।
सदन की बैठक में रिहायशी इलाकों में सिक्योरिटी गेट्स लगाने का मामला आया था। यह निर्णय लिया गया है कि पूरे शहर के लिए गेट्स लगाने की मंजूरी वास्तुकार विभाग से लेकर एक पॉलिसी चर्चा के लिए सदन की बैठक में लाई जाए ताकि जो एसोसिएशन लगवाना चाहती है वह पॉलिसी के तहत लगाए।
- आशा जसवाल, मेयर।