केंद्रीय राज्य मंत्री विजय सांपला की ताजपोशी में पूरे पंजाब से सांपला समर्थक जुटे, वहीं पंजाब भाजपा के सभी प्रमुख नेता भी शामिल हुए, लेकिन सांपला के लिए प्रधानगी की डगर आसान नहीं होगी। क्योंकि एक तरफ पार्टी में गुटबाजी हावी है। दूसरी तरफ, भाजपा का परंपरागत वोटर पार्टी से नाराज है।
सांपला के लिए सबसे बड़ी चुनौती सारी पार्टी को एकजुट करना होगा। वह यह जानते भी हैं, इसलिए ताजपोशी केसमय उन्होंने बाल कथाओं से यही संदेश दिया कि एकता में शक्ति है, सभी एकजुट हों। माहौल को भांपते हुए पंजाब प्रभारी प्रभात झा को भी बोलना पड़ा कि पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है, सभी एकजुट हैं। कमल शर्मा हों या विजय सांपला, सभी एक हैं। लेकिन प्रदेश भाजपा को गुटबाजी से निकालना आसान नहीं होगा। ताजपोशी में भी इसकी झलक दिखी। सांपला समर्थक गुट जहां हावी रहा, वहीं विरोधी गुट पूरी तरह शांत रहा। भाजपा ने 26 जिला प्रधान नियुक्त किए हैं, उनमें से ज्यादातर नजर नहीं आए। प्रदेश कार्यकारिणी के भी कई सदस्य नहीं दिखाई दिए।
ऊपरी तौर पर चाहे जितनी एकजुटता दिखाई जाए, लेकिन कमल शर्मा गुट अंदरखाते उनकी मुखालफत करेगा ही। अपने गुट में भी उनको विरोध झेलना पड़ सकता है। क्योंकि अविनाश राय खन्ना, अश्वनी शर्मा भी प्रधानगी के दावेदार थे। खन्ना को तो राज्यसभा सदस्यता से भी हाथ धोना पड़ा।
भाजपा ने दलित कार्ड जरूर खेला है, लेकिन समय बताएगा कि भाजपा के परंपरागत वोटर ब्राह्मण और बनिया वर्ग को सांपला कैसे साथ लेकर चलते हैं। और ये वर्ग कैसे सांपला के साथ चलते हैं। सांपला केसामने दूसरी बड़ी चुनौती परंपरागत वोटरों शहरियों और कारोबारियों को मनाना है। ये दोनों ही वर्ग भाजपा से नाराज हैं। कांग्रेस या आम आदमी पार्टी में से किसी की तरफ जा सकते हैं। सांपला सरकार पर दबाव बना कर इन वर्गों की कितनी मांगें मनवा पाते हैं, यह भी वक्त बताएगा।
दो मंत्रियों को बदलने की तैयारी
प्रदेश प्रधानगी में बदलाव केसाथ ही पार्टी ने दो मंत्रियों को बदलने की भी तैयारी कर ली है। माना जा रहा है कि मई में मंत्रिपद में बदलाव हो सकता है। नए मंत्रियों में अश्वनी शर्मा, मनोरंजन कालिया और डॉ. नवजोत कौर सिद्धू में से किन्हीं दो को जिम्मेदारी दी जा सकती है।