वर्तमान सरकार किसी भी प्रकार की अनिमितताओं को बर्दाश्त नहीं करेगी और कसूरवार अधिकारियों व कर्मचारियों को बख्शा नहीं जाएगा। विपक्षी सदस्यों की मांग पर दलाल ने कहा कि इस मामले की विजिलेंस जांच कराई जाएगी और डीएफओ जितेंद्र अहलावत को फील्ड पोस्ट से हटाया जाएगा
17 जनवरी को शिकायत, 7 फरवरी में आई जांच रिपोर्ट, कार्रवाई अब तक नहीं
4.15 करोड़ रुपये के घोटाले में आरोप है कि बिना पौधे लगाए ही फर्जी बिल तैयार कर लिए गए। केवल कागजों में ही सारा खर्च दिखाया गया और विभागीय नियमों का उल्लंघन किया गया। आईएफएस जितेंद्र अहलावत 27 जनवरी से 17 सितंबर 2021 तक बतौर वन मंडल अधिकारी अनुसंधान मंडल, पिंजौर में रहे। अहलावत के खिलाफ 17 जनवरी, 2022 को करोड़ों रुपये के गबन की शिकायत आई थी। मामले की जांच के लिए विनीत कुमार गर्ग की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गई, जिसमें पंकज गोयल सदस्य और यशपाल जांगड़ा सचिव थे। 7 फरवरी को भेजी रिपोर्ट सौंप दी, लेकिन आज तक किसी पर कार्रवाई नहीं की गई।
पौधे लगे नहीं, दिखाया खर्च
कमेटी ने जांच में पाया कि वर्ष 2020-21 और वर्ष 2021-22 के दौरान 51 लाख रुपये की राशि को लेकर ईपीएफ, ईएसआई, कांट्रेक्टर प्रॉफिट की अदायगी न करके इस राशि को लेबर, मशीनरी और मटीरियल पर खर्च किया गया। वर्ष 2020-21 के दौरान पहले से उपलब्ध 37 लाख रुपये को नए पौधे उगाने की अनुमति लेने के उपरांत नए पौधे न उगाकर इस धन राशि का गबन किया गया। ऐसे ही, वर्ष 2020-21 में पौधे उगाने के अलॉटिड भौतिक लक्ष्य से कम पौधे उगाकर पूरी अलॉटिड धन राशि को खर्च किया गया।
पौधों के रख-रखाव पर राशि खर्च की गई, जोकि वास्तव में उपलब्ध ही नहीं थे। इसके अलावा, फरवरी 2021 में नर्सरी में पौधे तैयार करने को भरी गई थैलियों से अधिक संख्या में उगाए गए पौधों के बिल चार्ज किए गए।