पूर्व डीजीपी जेल शशिकांत ने जेलों में मिल रहे नशे और कैदियों द्वारा चलाए जा रहे फोन पर अपने ही जेल प्रशासन को कई बार कटघरे में खड़ा किया है। वह कई बार खुले मंच पर भी बोल चुके हैं कि जेल में नशे और कैदियों द्वारा चलाए जा रहे फोन में मुलाजिमों का हाथ है।
मुलाजिम पैसे लेकर कैदियों को हर संभव सुविधाएं उपलब्ध करवाते हैं लेकिन जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। उन्होंने कई बार कहा था कि जेल मुलाजिम जब तक नहीं सुधरेंगे तब तक कैदियों पर शिकंजा कसना काफी मुश्किल है।
डीसी प्रदीप अग्रवाल ने कहा कि जेल में कैदी अपने साथी की मौत के बाद भड़के थे। जेल मुलाजिमों की तरफ से उन्हें काबू करने के लिए हवाई फायर किया गया था। इस हंगामे में करीब पांच कैदी घायल हुए और कुछ पुलिस मुलाजिम भी घायल हुए हैं।
सभी कैदियों को काबू कर बैरक में भेज दिया गया है। अब नुकसान का पता लगाया जाएगा। शाम को गिनती के बाद पता चलेगा कि कितने कैदी हैं। सरकार की तरफ से जो आदेश आएंगे उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।