इसकी खबर मिलते ही सुरक्षाकर्मी वहां आ गए और पुलिस को सूचना दी गई। उधर, आरोपी का कहना है कि वह पीजीआई में पिछले 21 वर्षों से काम कर रहा है लेकिन पिछले 6 महीने से उसकी ड्यूटी गर्ल्स हॉस्टल में लगा दी गई। इसे बदलवाने के लिए वह लगातार प्रशासन से अनुरोध कर रहा था लेकिन इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया। गर्ल्स हॉस्टल में पुरुषकर्मी के लिए कोई अलग शौचालय की भी व्यवस्था नहीं है।
पीजीआई में ऐसा काम दुर्भाग्यपूर्ण: मंजनीक
पीजीआई नर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष मंजनीक ने कहा कि इस घटना ने हॉस्टल मैनेजमेंट पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वुमन हॉस्टल में औरतों पर थोपे जाने वाले अनगिनत कानून हमें देखने को मिल जाते हैं, मगर इन घटनाओं पर काबू पाने के लिए कोई कानून नहीं दिखाई देता।
नर्सिंग एसोसिएशन पीड़िता के साथ खड़ा है। पीजीआई जैसे संस्थान में यह और भी दुर्भाग्यपूर्ण है। हम नर्सेज एसोसिएशन की तरफ़ से पीजीआई प्रशासन से अपील करते हैं कि महिला हॉस्टल के अंदर महिला कर्मचारियों को ही ड्यूटी पर लगाया जाए।
मामले में जांच कमेटी गठित कर दी गई है। आरोपी का मोबाइल फोन पुलिस ने कब्जे में लेकर लैब में भेज दिया है। सफाईकर्मी की ड्यूटी रिपोर्ट आने के बाद ही मामले पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। - कुमार गौरव, डीडीए, प्रवक्ता पीजीआई।