कोरोना के मरीजों की देखभाल करते हुए खुद के चेहरे पर जख्म हो गए। बावजूद इसके उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। कोरोना काल में नर्सिंग के अपने फर्ज को सबसे ऊपर रखकर वह लगातार संक्रमित मरीजों की देखभाल में जुटी रहीं। हम बात कर रहे हैं पीजीआई नर्सिंग वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष और नर्सिंग ऑफिसर हितिका ठाकुर की।
कोविड के दौरान अपनी मेहनत और निष्ठा के बल पर कोरोना के मरीजों की देखभाल करने के साथ हितिका नेे अन्य कई महत्वपूर्ण कार्यों में अपना योगदान दिया। उनका कहना है कि जो योद्धा एक बार जंग में उतर जाते हैं, वह जख्मी होकर घर नहीं लौटते। कोरोना से जंग में जीत के लिए लगातार मैदान में डटे रहना होगा। हितिका की कर्तव्यनिष्ठा और हिम्मत पर उनके परिवार के साथ ही पीजीआई प्रशासन को भी गर्व है।
हितिका की योग्यता और निष्ठा को देखते हुए पीजीआई प्रशासन उन्हें कोरोना डेडिकेटेड हॉस्पिटल की आईसीयू में दो बार अहम जिम्मेदारियां सौंप चुका है। आईसीयू में ड्यूटी के दौरान हितिका ने पूरी-पूरी रात जागकर कोरोना के गंभीर मरीजों की देखभाल की है। हितिका का कहना है कि कोरोना महामारी से डर कर नहीं हिम्मत से लड़कर जीत मिलेगी। इसलिए वह खुद को संक्रमण से बचाने के पुख्ता इंतजाम करके इस जंग में उतरी हैं।
पिता से मिली शिक्षा का बढ़ाया मान
हितिका के पिता खेमराज ठाकुर हिमाचल प्रदेश में शिक्षक हैं। हितिका के लिए अपने पिता से मिली शिक्षा इस जीवन की सबसे अमूल्य निधि है। उनका कहना है कि उनके आदर्श और कर्तव्य पथ पर निष्ठा के साथ चलने की सीख के बल पर ही आज वह कोरोना महामारी से लड़ने के लिए मजबूती से तैयार खड़ी हैं।
मरीजों की सेवा के साथ बढ़ाया पीजीआई का मान
हितिका एक नर्सिंग ऑफिसर के साथ कई अन्य गुणों से भी संपन्न हैं। पंजाब की तरफ से कुछ दिनों पहले आयोजित किए गए मैराथन में उन्होंने तृतीय स्थान प्राप्त करके पीजीआई का मान बढ़ाया। वहीं, दूसरी तरफ रोटो के साथ मिलकर पेंटिंग कंपीटीशन का आयोजन कर अपने एसोसिएशन के साथ मिलकर अंगदान के प्रति लोगों को जागरूक किया।
इतना ही नहीं महज 26 साल की उम्र में हितिका पीजीआई नर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर चुने जाने के साथ ही रक्तदान महादान जैसे अभियान को भी आगे बढ़ा रही हैं। कोविड-19 के दौरान उन्होंने दो बार रक्तदान कर जरूरतमंद की जिंदगी बचाने में भी योगदान दिया है।