परिजनों ने दुराचार का केस दर्ज कराया और जब कोर्ट में केस चला तो पीड़िता ने कहा कि वह अपनी मर्जी से युवक के साथ गई थी और उसी के साथ रहना चाहती है।
वहीं, कोर्ट में यह भी साबित नहीं हो सका कि पीड़िता नाबालिग है। लिहाजा, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने दुराचार के आरोपी को बरी कर दिया।
यह मामला कालका थाने में पिछले वर्ष सितंबर में दर्ज हुआ था।
कालका निवासी एक व्यक्ति ने पुलिस को शिकायत दी थी कि पड़ोसी युवक ने उसकी बेटी को शादी का झांसा देकर किडनैप कर लिया।
पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर तलाश शुरू की और दो दिन बाद दोनों को पिंजौर के नजदीक से रिकवर कर लिया। इसके बाद लड़की का मेडिकल कराया गया और दुराचार की धारा भी शामिल कर युवक को गिरफ्तार कर लिया गया।
वहीं, जब लड़की ने कोर्ट में 164 के तहत बयान दर्ज कराया तो उसने कहा कि वह अपनी मर्जी से गई थी, जबकि उसके पिता की शिकायत थी कि वह नाबालिग है।
लिहाजा उसे परिजनों के साथ भेज दिया गया, जबकि आरोपी को न्यायिक हिरासत में अंबाला जेल भेज दिया गया था। तब से वह जेल में ही था।
अब कोर्ट में यह साबित नहीं हो सका कि पीड़ता नाबालिग है। आरोपी पक्ष से लीगल एड के एडवोकेट विकास आर्य के मुताबिक, युवती ने कोर्ट में बयान दिया है कि वह अपनी मर्जी से सुनील के साथ गई थी। लिहाजा आरोपी को कोर्ट से बरी कर दिया गया है।