अलोक को कला कि दुनिया में दादा के नाम से जाना जाता है। पेंटिंग ब्रश के जरिए इंसानी दिमाग को चित्रित करना ही उनकी खूबी है।
इसका एक नमूना चंडीगढ़ सेक्टर-10 की गवर्नमेंट म्यूजियम और आर्ट गेलरी में लगी पेंटिंग में देखा जा सकता है। इस खास पेंटिंग में उन्होंने अलग-अलग चेहरों से एक चेहरा बनाकर इंसानी दिमाग की कई जुदा सोच को पेश किया है।
दादा ने दिल की बातें साझा करते हुए बताया कि कला कि तरफ झुकाव 4 साल की उम्र से ही हो गया था, लेकिन कोलकाता के शांती निकेतन ने मेरे अंदर छिपी कला को पंख लगा दिए और मैं पेंटिंग को लेकर और सजग हो गया।
शांती निकेतन से पास आउट होने के बाद कॉलेज में फिजिक्स में ग्रेजूएशन करने लगा, लेकिन मन पेंटिंग में ही था, इसलिए कॉलेज के बाद पेंटिंग बनाना जारी रहा। हालांकि शुरुआत में कुछ कठिनाई जरूर आई।
इसके बाद दून पब्लिक स्कूल में आर्ट एंड मीडिया में टीचर की जॉब की तो इंसानी दिमाग और उसकी सोच को लेकर पेंटिंग बनाना शुरू किया। दादा की पेंटिंग न्यूयार्क और लंदन में हुई आक्शन में भी जा चुकी हैं।
एक आर्टिस्ट कि जरूरत के सवाल में दादा ने कहा कि आर्टिस्ट इंसान के लिए एक मनोरंजन का केंद्र है। वह इंसान को जिंदगी के नए रूप से मिलाते हैं।
चंडीगढ़ आर्ट के मामले में अभी पीछे’
चंडीगढ़ बहुत खूबसूरत है, लेकिन आर्ट के मामले में यह अभी पीछे है। ऐसा इसलिए क्योंकि चंडीगढ़ में पैसा बहुत है और जब पैसा ज्यादा हो तो और ज्यादा कमाने की चाह होती है, जिसकी वजह से आर्ट में युवा दिलचस्पी नहीं लेता।
और दुर्भाग्य कि बात है कि इतने अच्छे शहर में कला से संबधित कॉलेज भी है, लेकिन कोई बड़ा आर्टिस्ट नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि जो कलाकार यहां से पढ़कर बाहर कुछ बन जाता है वह वापस अपनी कला को ज्ञान के रूप में बाटता नहीं, इन कॉलेज में कलाकारों को पढ़ाना चाहिए जो कला के बारीक से बारीक पहलु को समझा सके।
मेरी यह पेंटिंग के यहां खरीददार भी आए। अभी तक मेरी दो पेंटिंग बिक चुकी है। दादा अभी दून स्कूल में आर्ट और मीडिया के हेड है। यह पेंटिंग एग्जिबिशन 18 जनवरी तक आर्ट गैलरी सेक्टर 10 में लगी है।