बच्ची से दुराचार करने के दोषी सौतेले बाप को कोर्ट ने 10 साल कैद और 12 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने पर दो महीने की अतिरिक्त सजा का प्रावधान है।
यह फैसला फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश रितु गर्ग की कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट में करीब सात महीने तक चली सुनवाई के दौरान दर्जन भर लोगों की गवाही हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत सोमवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया।
बाल संरक्षण अधिकारी की शिकायत पर हुई थी कार्रवाई
सात जनवरी को जगाधरी शहर पुलिस ने बाल संरक्षण अधिकारी रीचा की शिकायत पर दुर्गा गार्डन निवासी एक व्यक्ति के खिलाफ दुराचार का केस दर्ज किया था। इस पर आरोप था कि उसने अपनी सौतेली बच्ची के साथ दुराचार किया है। पुलिस को दी शिकायत में बाल संरक्षण अधिकारी ने कहा कि उन्हें सूचना मिली थी कि आरोपी ने दो अनाथ बच्चों को अपने पास रखा हुआ है और उनका शोषण किया जा रहा है।
इस पर बाल संरक्षण अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उस जगह का दौरा किया। उन्हें पता चला कि वहां किराए पर तीन परिवार रहते हैं। एक महिला, जिसके स्वयं के तीन बच्चे हैं, वह पीड़ित बच्ची और उसके भाई का पालन पोषण कर रही है। इसकी एवज में वह हर महीने बच्ची के पिता से पालन पोषण का खर्च लेती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए टीम सदस्य बच्ची को बाल कुंज ले गए। तीन जनवरी को बाल कल्याण समिति की बैठक हुई, जिसके उपरांत बच्ची का मेडिकल करवाया गया। मेडिकल रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि बच्ची से सेक्सुअल एब्यूज हुआ है।
बाल संरक्षण समिति ने बच्ची की काउंसिलिंग करवाने का निर्णय लिया। जब बच्ची की काउंसिलिंग की गई, तो उसने बताया कि उसके सौतेले पिता ने उसका यौन शोषण किया है। इसके उपरांत मामले की शिकायत शहर पुलिस को दी गई। पुलिस ने बाल संरक्षण अधिकारी रीचा की शिकायत पर दुर्गा गार्डन निवासी मुन्ना के खिलाफ भादंसं की धारा 376 और 6 पोक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी।
पुलिस ने 9 जनवरी को आरोपी को गिरफ्तार किया। 10 जनवरी को पुलिस ने मुन्ना को कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे एक दिन के रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस ने उसे दोबारा कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
इसके बाद मामले की सुनवाई कोर्ट में शुरू हो गई। कोर्ट में करीब सात महीने तक चली सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के उपरांत फास्ट ट्रैक कोर्ट की न्यायाधीश रीतु गर्ग ने सोमवार को अपना फैसला सुना दिया।