देश की उच्च शिक्षा में बड़े स्तर पर बदलाव की जरूरत है। तभी हमारे कॉलेज और विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को स्थापित कर सकेंगे। कॉलेज और यूनिवर्सिटी में बरसों पुराने सिलेबस में बदलाव के अलावा पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाओं का अभाव और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी बड़ी समस्या है।
यह विचार शनिवार को देश के उपराष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी ने रखे। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी में 67वीं एनुअल इंडियन केमिकल इंजीनियरिंग कांग्रेस (कैमकॉन-2014) में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
कैमकॉन में देश और दुनिया से आए लगभग एक हजार शिक्षाविद और वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए डॉ. अंसारी ने देश के विकास में उच्च शिक्षा का महत्व बताया।
उन्होंने देश के युवाओं के सामने ऐसी शिक्षा की पैरवी की, जिससे किसी भी डिग्रीधारक को आसानी से रोजगार मिल सके। उपराष्ट्रपति ने प्लानिंग कमीशन रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 2010 में इंडियन केमिकल इंडस्ट्री 108 करोड़ अमेरिकी डालर थी। जो देश की जीडीपी (ग्रोस डोमेस्टिक प्रोडेक्ट) 7 फीसदी है। देश के केमिकल सेक्टर का इंडस्ट्रियल प्रोडक्टशन इंडेक्स में 14 फीसदी और एक्सपोर्ट में 11 फीसदी की हिस्सेदारी रहती है।
डॉ. अंसारी के अनुसार, केमिकल प्रोडक्शन में भारत एशियाई देशों में चीन और जापान के बाद तीसरे नंबर पर है। उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल स्तर पर भारतीय केमिकल इंडस्ट्री की भागेदारी सिर्फ तीन फीसदी है। जबकि इसमें बड़े स्तर पर बढ़ोतरी की गुंजाइश है।
उन्होंने केमिकल इंडस्ट्री की वर्तमान में फूड, वाटर, एनर्जी सिक्योरटी, इन्वायरमेंट, हेल्थकेयर और मेन्युफेक्चरिंग में बड़ी हिस्सेदारी बताई है। केमिकल इंडस्ट्री को उन्होंने देश की सबसे पुरानी इंडस्ट्री बताया।