अब प्रदेशभर के पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को अपने कार्यों के लिए अंबाला जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। करनाल में ही उन्हें वह तमाम सुविधाएं मुहैया करा दी जाएंगी, जोकि अंबाला के वेटर्न सहायता केंद्र में ही उपलब्ध हो रही थी। दरअसल, करनाल में मंगलवार को वेटर्न सहायता केंद्र का शुभारंभ किया गया।
अंबाला से आए जनरल ऑफिसर इन कमांड हेमंत जुनेजा ने इस वेटर्न सहायता केंद्र का शुभारंभ किया। करनाल, कैथल, पानीपत व सोनीपत चार जिलों के पूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों के लिए इस केंद्र की शुरुआत की गई है। हालांकि, हेमंत जुनेजा ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश के किसी भी जिले के पूर्व सैनिक या उसके आश्रित को यदि ऐसा लगता है कि करनाल सेंटर नजदीक है तो वह यहां से सुविधाएं ले सकेगा।
यह मिलेंगी सुविधाएं
जन्म प्रमाण पत्र का डिजिटल सर्टिफिकेशन यहां से बन जाएगा। सैनिकों की विधवाओं व पूर्व सैनिकों को पेंशन के लिए यह सर्टिफिकेट बनवाना जरूरी होता है। अब से पहले केवल अंबाला में ही यह सर्टिफिकेट बनाया जा रहा था। यह कार्ड भी अब करनाल में ही बनने लगेगा।
इसी के साथ ही मेडिकल संबंधित दिक्कतें भी करनाल के इसी सेंटर से निपटाई जाएंगी। इतना ही नहीं किसी भी प्रकार की शिकायत पूर्व सैनिक व उनके आश्रित इस सहायता केंद्र में कर सकेंगे। ऐसे में एक ही छत के नीचे चार जिलों के पूर्व सैनिकों सहित प्रदेशभर के पूर्व सैनिक व उनके आश्रितों को करनाल में उपलब्ध हो सकेंगे।
जरनल ऑफिसर इन कमांड हेमंत ने बताया कि पूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों का पेंशन व अन्य पैसा जोकि करीब 6 करोड़ रुपये है, वह उन्हें सही तरीके से नहीं मिल पा रहा है। इसके लेने के लिए रोजाना अंबाला में 200 पूर्व सैनिक व उनके आश्रित पहुंच रहे हैं। ऐसे में करनाल में इस वेटर्न केंद्र की स्थापना की गई है।
इस सहायता केंद्र में पूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों को तमाम सहायता मुहैया कराई जाएगी। पेंशन के अतिरिक्त आधार कार्ड लिंक इत्यादि की व्यवस्था ही उनके लिए यहीं कराई जाएगी। केंद्र के शुरू होने से अंबाला जाने वाला खर्चा व वहां आने-जाने की दिक्कतों से भी पूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों को नहीं होगी।