चंडीगढ़। सेक्टर-35 के प्राचीन कला केंद्र के एमएल कौसर सभागार में मंगलवार को केंद्र की 284वीं बैठक हुई। इस दौरान नासिक से आई वैदेही कुलकर्णी ने अपनी विशेष शैली के साथ कुचिपुड़ी नृत्य की प्रस्तुति दी तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। उन्होंने सबसे पहले नतेशा कौतुवम प्रस्तुत किया। इसमें भगवान शिव के अलौकिक रूप को नृत्य के माध्यम से पेश किया। इसके पश्चात भगवान शिव की स्तुति और फिर पदमावती श्रृंगार प्रस्तुत किया। इसमें देवी पदमावती की भगवान श्रीनिवास के साथ बिताई खूबसूरत रात का चित्रण किया। वैदेही की भाव भंगिमाएं एवं पैरों की चाल को देख दर्शकों ने तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया।
इसके उपरांत वैदेही ने कुचिपुड़ी नृत्य का एक रूप जवाली प्रस्तुत किया। इसमें नायिका द्वारा नायक से शिकायत करते हुए एक खूबसूरत भाव प्रदर्शन है। नायिका नायक से अपने जलन भाव का प्रदर्शन करती है। कार्यक्रम के अंत में वैदेही ने मरकाटा मणीमाया रचना पेश की, जिसमें भगवान कृष्ण की सुंदरता और महिमा का बखान किया गया। प्रस्तुति का समापन पीतल की थाली पर नृत्य के साथ हुआ जो कि कुचिपुड़ी नृत्य की एक खास विशेषता है। कार्यक्रम के अंत में केंद्र के सचिव सजल कौसर एवं रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कौसर ने वैदेही कुलकर्णी को सम्मानित किया।
चार वर्ष की आयु में ही शुरू कर दिया था नृत्य सीखना
वैदेही ने 4 वर्ष की अल्पायु में नृत्य सीखना शुरू कर दिया था। बचपन से ही नृत्य में उनकी गहरी रूचि थी। इन्होंने पद्मभूषण गुरु चिन्ना सत्यम के अलावा गुरु वेम्पति रवि शंकर और श्रीमई वेम्पति से नृत्य की शिक्षा प्राप्त की। कुचिपुड़ी एवं भरतनाट्यम नृत्य में महारथ रखने वाली वैदेही ने कई कार्यक्रमों में नृत्य की प्रस्तुति देकर वाहवाही बटोरी है।