वाड्रा लैंड डील मामले में कार्रवाई करके अशोक खेमका ने चहकने की कोशिश की तो कैग ने उन्हें आईना दिखा दिया। कंट्रोलर एंड आडिटर जनरल ऑफ इंडिया (कैग) की रिपोर्ट में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा का नाम लिए बिना उनकी कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड और डीएलएफ के बीच लैंड डील पर उंगली उठाते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी गई है।
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स्काईलाइन ने गुड़गांव के मानेसर में 3.5 एकड़ भूमि सस्ते दाम पर खरीदने के बाद उसका चेंज आफ लैंड यूज करके डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेच दी थी। कैग ने इस मामले में आरोप लगाया है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इस मामले में नियमों की अनदेखी कर डील में सहयोग दिया।
सीनियर आईएएस अधिकारी डॉ. अशोक खेमका ने कहा है कि कैग की रिपोर्ट में वाड्रा लैंड डील पर उनकी कार्रवाई की पुष्टि हुई है। हालांकि, चार्जशीट के कलंक से वे लगातार परेशान रहे हैं।
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हरियाणा में भूपेंद्र हुड्डा के शासनकाल में आईएएस अधिकारी अशोक खेमका, जोकि मौजूदा समय में खट्टर सरकार में ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के पद पर तैनात हैं, ने उक्त लैंड डील की जांच के आदेश जारी करने के साथ ही डील को रद्द कर दिया था।
इसके बाद हुड्डा सरकार ने वाड्रा लैंड डील को क्लीन चिट देते हुए खेमका के खिलाफ विभिन्न मामलों में जांच शुरू करा दी थी। खेमका ने वीरवार को लगातार ट्वीट करते हुए आनलाइन ही अपनी बात रखी।
3 ट्वीट करके खेमका ने दी सफाई
पहले ट्वीट में खेमका ने कहा, ‘कैग रिपोर्ट ने वाड्रा लैंड लाइसेंस डील में मेरी कार्रवाई की पुष्टि की है, लेकिन मुझे लगातार चार्जशीट के कलंक के परेशान किया गया।’
दूसरे ट्वीट में खेमका ने कहा, ‘असली गुनाहगार मुझ पर फैसला देने के लिए बैठे हैं। मेरा दुख और परेशानी राजनीति ढांचे की सफाई करने में सहायक साबित होंगे।’
तीसरे ट्वीट में कहा गया, ‘लाइसेंसों की कालाबाजारी और अपनों को परमिट देकर जनता के पैसे को लूटा जाता है। क्या कालाबाजारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी?’
कैग रिपोर्ट में यह कहा गया
बुधवार को हरियाणा विधानसभा में पेश की गई कैग की साल 2013-14 की रिपोर्ट में प्रदेश के टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की कारगुजारी पर उंगली उठाई गई है।
वाड्रा लैंड डील पर रिपोर्ट में कहा गया है, ‘जमीन के लाइसेंस ट्रांसफर की न तो औपचारिक अनुमति देते समय और न ही सैद्धांतिक मंजूरी देते समय विभाग की भूमिका दिखाई देती है, जिससे कि कुल लागत पर कुल लाभ की 15 फीसदी राशि सरकार के खाते में आती।’
रिपोर्ट में आगे कहा गया, ‘इस तरह डेवेलपरों को जमीन बेचकर भारी भरकम मुनाफा कमाने का मौका मिल गया, जबकि सरकार एक बड़ी राशि वसूलने से वंचित रह गई।’
राजनीतिक दुर्भावना से काम कर रही भाजपा सरकार
राष्ट्रीय कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के चेयरमैन रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भाजपा सरकार पर राजनीतिक दुर्भावना से काम करने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा के प्रधान महालेखाकार (पीएजी) ने वाड्रा-डीएलएफ लैंड डील पर पांच पत्र लिखकर प्रदेश से जानकारी मांगी है, लेकिन आज तक जवाब नहीं मिला।
सुरजेवाला ने कहा कि कैग की साल 2013-14 की रिपोर्ट को सदन पटल पर रखने से पहले अगर पीएजी के पत्रों का जवाब दे दिया जाता तो इसमें लाभ की 15 प्रतिशत राशि खजाने में जमा कराने का मुद्दा ही नहीं उठता।
सुरजेवाला ने कहा कि कैग की रिपोर्ट के आधार पर जो कुछ प्रचारित किया जा रहा है, वह अर्द्ध सत्य है। रिपोर्ट के गलत तर्क निकाले जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कैग ने न तो कांग्रेस सरकार को और न ही राबर्ट वाड्रा को दोषी ठहराया है। कैग ने ऐसा कोई भी निर्णय नहीं दिया, जिससे कि दोष लगाया जा रहा है।
कैग की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इनेलो नेता अभय चौटाला ने कहा है कि कैग ने इनेलो के आरोपों की पुष्टि कर दी है। ऐसे में प्रदेश सरकार को चाहिए कि तुरंत डीएलएफ-वाड्रा लैंड डील के मामले में हुई घपलेबाजी सहित हुड्डा सरकार के कार्यकाल में किए गए सभी भूमि घोटालों की उच्चस्तरीय जांच सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के किसी न्यायाधीश की देखरेख में करवाई जाए।
चौटाला ने कहा कि यह मामला सबसे पहले इनेलो ने ही उठाया था। सीएजी की रिपोर्ट के बाद अब यह बात साफ हो गई है कि वाड्रा सहित सरकार के चहेतों की कंपनियों को हुड्डा सरकार ने अरबों का फायदा पहुंचाने के लिए किस तरह नियम-कायदों को दरकिनार कर दिया।