हरियाणा में वाड्रा-डीएलएफ लैंड डील केस की जांच के लिए गठित ढींगरा आयोग कभी भी सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप सकता है। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट बनकर तैयार है। पिछले कई दिनों से रिपोर्ट को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। हाल ही में मुख्य सचिव ने अधिसूचना जारी कर आयोग का समय बढ़ाकर 30 जून तक किया है।
जस्टिस ढींगरा आयोग की रिपोर्ट आने के बाद हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा केअलावा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इतना ही नहीं हरियाणा की पूर्ववर्ती हुड्डा सरकार के कार्यकाल में लगे अधिकारियों की भी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। इसमें टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की भूमिका अहम है।
मालूम हो कि ढींगरा आयोग का गठन पिछले साल मई माह में हुआ था, लेकिन काम जून से ही शुरू हो पाया था। इस बीच आयोग का कार्यकाल तीन बार बढ़ाया गया है। सरकार ने शुरुआती दौर में गुड़गांव के सेक्टर 83 में वाणिज्यिक कालोनियों के विकास के लिए जारी लाइसेंस की जांच के लिए आयोग बनाया था, लेकिन बाद में गुड़गांव के अन्य चार गांव की जांच भी आयोग के जिम्मे लगा दी गई। इन गांवों में सेक्टर 78 से 86 तक का क्षेत्र शामिल है।
इस मामले में ढींगरा ने आईएएस अधिकारी डीएस ढेसी, टीसी गुप्ता और एसएस ढिल्लो से पूछताछ की है। तीनों अफसरों ने आयोग केसामने अपना पक्ष रख दिया है, लेकिन वाड्रा से पूछताछ नहीं हुई है। लिहाजा अब सियासी हलकाें में आयोेग की रिपोर्ट का इंतजार है। साथ ही यह सवाल भी उठ रहे हैं कि सरकार प्रकाश सिंह की रिपोर्ट की तरह इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करेगी या नहीं।