हरियाणा में वाड्रा-डीएलएफ लैंड डील की जांच के लिए गठित जस्टिस एसएन ढींगरा आयोग को मिली 2 माह की मोहलत। दरअसल हरियाणा में वाड्रा-डीएलएफ लैंड डील की जांच के लिए गठित जस्टिस एसएन ढींगरा आयोग का कार्यकाल 31 अगस्त तक बढ़ा दिया गया है।
जस्टिस ढींगरा ने प्रदेश मुख्य सचिव को भेजी ई-मेल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से अपनी रिपोर्ट दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय मांगा था। मुख्यमंत्री ने जस्टिस ढींगरा के अनुरोध पर आयोग को एक्सटेंशन दे दी है। ढींगरा आयोग को चौथी बार एक्सटेंशन मिली है। इससे पहले आयोग तीन एक्सटेंशन ले चुका है। बीती सात जून को मुख्य सचिव ने ढींगरा आयोग को 30 जून (वीरवार) तक का समय दिया था।
इस बार पूरी संभावना थी कि आयोग अपनी रिपोर्ट वीरवार को सरकार के सुपुर्द कर देगा, लेकिन एन वक्त पर आयोग की ओर से इसके लिए छह सप्ताह का और समय मांगे जाने से सरकार की मुसीबतें बढ़ गई हैं। प्रकरण को लेकर विपक्ष पहले ही आक्रामक है। इस बीच, पूर्व सीएम हुड्डा ने आयोग के गठन पर सवाल खड़ा किया है। कांग्रेस ने आयोग पर ट्रस्ट के नाम पर सरकार से फायदा लेने का आरोप भी लगाया है।
हरियाणा की भाजपा सरकार ने पिछले साल मई माह के दौरान वाड्रा-डीएलएफ लैंड डील की जांच के लिए जस्टिस एसएन ढींगरा आयोग का गठन किया था। हालांकि आयोग को अपनी जांच रिपोर्ट छह माह के भीतर देनी थी, लेकिन आयोग के आग्रह पर सरकार पहले ही तीन बार आयोग के कार्यकाल का विस्तार कर चुकी है। 30 जून को आयोग के कार्यकाल की समय सीमा समाप्त हो चुकी है।
आयोग का तर्क
ढींगरा आयोग ने सरकार से छह सप्ताह का समय मांग कर यह तर्क दिया है कि इस प्रकरण में कुछ अधिकारियों के नाम सामने आ रहे हैं। इन अधिकारियाें ने भी फायदा उठाया है। ढींगरा ने कहा कि वीरवार को रिपोर्ट सौंपने से पहले उन्हें गुड़गांव के एक व्यक्ति ने कुछ दस्तावेज सौंपे, जिनमें लैंड डील से संबंधित लेन-देन और उन लोगों का जिक्र है जिन्हें इस डील से फायदा पहुंचा है। लिहाजा इन दस्तावेजों की जांच के लिए और समय की जरूरत है।
अटकलों पर लगा विराम
सूत्रों के मुताबिक आयोग ने जांच रिपोर्ट तैयार कर ली है। रिपोर्ट तैयार किए जाने से पहले आयोग की ओर से हरियाणा के मुख्य सचिव समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा चुकी है। आयोग ने जांच के लिए करीब 26 अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए हैं। वीरवार को दिनभर इन अटकलों का दौर चलता रहा कि ढींगरा आयोग द्वारा किसी भी समय मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को रिपोर्ट सौंपी जा सकती है, लेकिन आयोग की तरफ से दोबारा समय मांगे जाने के बाद सारी अटकलों पर विराम लग गया।