चंडीगढ़ नगर निगम में ज्यादातर कर्मचारी अनुबंध और बाहरी स्रोतों (आउटसोर्स) से काम पर रखे गए हैं इसलिए निगम के 110 सरकारी मकान खाली हैं। विभिन्न यूनियनों और फेडरेशन ने मांग रखी थी कि इन मकानों को अनुबंधकर्मियों को दे देना चाहिए। प्रशासन ने इस मांग को ठुकरा दिया है। वहीं, प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने खाली मकानों को यूटी जनरल पूल में ट्रांसफर करने के आदेश दिए हैं।
धर्मपाल की अध्यक्षता में बीते दिनों विभिन्न यूनियन और फेडरेशन के पदाधिकारियों की मांगों पर बैठक हुई। इसमें यूनियन के पदाधिकारियों ने मांग रखी थी कि नगर निगम और चंडीगढ़ प्रशासन के कई मकान वर्षों से खाली हैं। उन्हें अनुबंध पर काम कर रहे कर्मचारियों को दिया जाना चाहिए। इस पर नगर निगम की आयुक्त आनिंदिता मित्रा ने कहा कि नगर निगम के मकान आवंटन नियम के अनुसार सरकारी मकान अनुबंध और दैनिक मजूदरी करने वाले कर्मचारियों को नहीं दिए जा सकते। उन्होंने कहा कि नगर निगम में ज्यादातर कर्मचारी अनुबंध पर कार्य कर रहे हैं इसलिए उनके कई मकान खाली पड़े हैं। इसके बाद प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने आयुक्त आनिंदिता मित्रा को आदेश दिया कि उनके जितने भी मकान खाली पड़े हैं उन्हें यूटी के जनरल पूल में ट्रांसफर किया जाए ताकि प्रशासन के जो कर्मचारी घर के इंतजार में हैं, उन्हें वह मकान आवंटित किए जा सकें।
हाउस अलॉटमेंट कमेटी की सचिव ने दिए ये तर्क
बैठक में हाउस अलॉटमेंट कमेटी (एचएसए) की सचिव नितिका पवार की तरफ से बताया गया कि सरकारी मकान सिर्फ नियमित कर्मचारियों को ही दिया जाता है। कहा कि अनुबंध और दैनिक मजूदरी करने वाले कर्मचारियों को सरकारी मकान देना ठीक नहीं होगा क्योंकि यह कर्मचारी निजी ठेकेदार द्वारा मुहैया कराए जाते हैं। इन्हें निजी ठेकेदार कभी भी बदल सकते हैं। ऐसी स्थिति में विभाग के लिए इन कर्मचारियों से घर खाली करवाना और किराया राशि वसूलना मुश्किल होगा।