चंडीगढ़। बिजली विभाग के किए जा रहे निजीकरण को रद्द कराने के लिए यूटी पावरमेन यूनियन का प्रतिनिधिमंडल वीरवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल से मिला। उन्होंने विभाग का निजीकरण रद्द करने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में यूनियन के महासचिव गोपाल दत्त जोशी, प्रधान ध्यान सिंह, अमरीक सिंह, गुरमीत सिंह, चरणजीत सिंह व हरजिंदर सिंह शामिल थे।
यूनियन के महासचिव गोपाल दत्त जोशी ने बताया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल ने यूनियन की बातों से पूरी सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में सस्ती बिजली तथा निर्विघ्न सप्लाई देने, बिजली मंत्रालय के सभी टारगेट पूरा करने के बावजूद अगर विभाग मुनाफे में है तो इसे निजी हाथों में सौंपना जनता से धोखा करना तथा पूंजीपतियों की सेवा करना है। उन्होंने इस मुद्दे को हर प्लेटफार्म पर उठाने का आश्वासन दिया। जोशी ने बताया कि भारत सरकार ने 17 अप्रैल 2020 को बिजली एक्ट में संशोधन करने के लिए बिजली (अमेंडमेंट) बिल 2020 का ड्राफ्ट तैयार कर संबंधित स्टेक होल्डरों से सुझाव आमंत्रित किए। अभी बिल संसद में पेश भी नहीं हुआ। इससे पहले ही सभी केंद्र शासित प्रदेशों के बिजली वितरण का निजीकरण का फैसला कर लिया। जब यूटी में बिजली एक्ट 2003 की सभी धाराएं लागू हैं तो उसका संसद में संशोधन से पहले ही यूटी का निजीकरण करना न्यायोचित नहीं है।
शत प्रतिशत मीटरिंग सप्लाई है। बिजली की दरें 2.75 पैसे से शुरू है तथा पड़ोसी राज्यों से कई गुना सस्ती बिजली दी जा रही है। पिछले 5 साल से बिजली की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है तथा विभाग को बेस्ट यूटीलिटी का अवार्ड दिया गया है।