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Chandigarh News: यूटी पुलिस का स्मार्ट कारनामा...दिवंगत मंत्री के खिलाफ दर्ज कर ली एफआईआर

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चंडीगढ़। खुद को स्मार्ट बताने वाली चंडीगढ़ पुलिस ने वारिस पंजाब दे के समर्थकों के प्रदर्शन के बाद दर्ज एफआईआर में करीब दो साल पहले दिवंगत हो चुके पंजाब के पूर्व विधायक एवं पूर्व मंत्री अजैब सिंह मुखमैलपुर को नामजद आरोपी बना दिया जबकि मौके पर मौजूद कई प्रमुख चेहरों के नाम एफआईआर में शामिल ही नहीं किए गए। मामला सामने आने के बाद पुलिस को अपनी गलती स्वीकार करनी पड़ी और रिकॉर्ड में संशोधन करना पड़ा।
बुधवार को खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह और बंदी सिखों की रिहाई की मांग को लेकर निकले वारिस पंजाब दे के समर्थक चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री भगवंत मान के सेक्टर-2 स्थित सरकारी आवास के नजदीक तक पहुंच गए थे। प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग तोड़ वॉटर कैनन पर चढ़ गए थे और धक्का-मुक्की में कई पुलिसकर्मी भी घायल हो गए थे।
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घटना के अगले दिन दर्ज एफआईआर ने पुलिस की और किरकिरी करा दी। एफआईआर में पूर्व विधायक एवं पूर्व मंत्री अजैब सिंह मुखमैलपुर का नाम शामिल कर दिया गया, जबकि उनका वर्ष 2025 में निधन हो चुका है। वह 1997 में घनौर से विधायक चुने गए थे और पंजाब सरकार में मंत्री भी रहे। मामला सामने आने के बाद उनके परिवार ने इसे पुलिस की गंभीर लापरवाही बताया।
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एफआईआर में विधायक मनप्रीत सिंह अयाली, लखा सिधाना, भाना सिद्धू और एडवोकेट इमान सिंह खारा समेत कई नेताओं के नाम हैं लेकिन पूरे आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह का नाम सूची से गायब है। इस पूरे मामले पर आईजी पुष्पेंद्र कुमार ने कहा कि एफआईआर में अजैब सिंह मुखमैलपुर का नाम शामिल होना अनजाने में हुई गलती थी। इसे बाद में सुधारते हुए पहली केस डायरी से उनका नाम हटा दिया गया है।
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