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प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने नगर निगम सदन को किया संबोधित, 'मांगा तो बहुत, मिला कुछ भी नहीं'

Sat, 31 Aug 2019 11:27 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्रशासक वीपी सिंह बदनौर - फोटो : अमर उजाला
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पंजाब के गवर्नर और चंडीगढ़ के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने नगर निगम सदन की बैठक को शुक्रवार को संबोधित किया। 25 मिनट के भाषण में उन्होंने पिछले विकास के कार्यों के बारे में जिक्र किया। मेयर ने शहर की विभिन्न विकास योजनाओं के लिए 198 करोड़ रुपये का फंड मांगा, लेकिन बदनौर ने इस पर कुछ नहीं कहा। प्रशासक ने नगर निगम में अपने भाषण में कहा कि पानी की समस्या से जूझ रहे शहर के लोगों को अगले महीने के अंत तक अतिरिक्त पानी मिलना शुरू हो जाएगा।
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वहीं, सदन को संबोधित करते हुए सांसद किरण खेर, प्रशासक के सलाहकार, गृह सचिव, निगम कमिश्नर सहित अन्य निगम अधिकारियों और पार्षदों के समक्ष कई अहम विषयों पर बोला और पानी के विषय पर एलान किया। प्रशासक ने स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट, पार्किंग, निगम के राजस्व से लेकर बिजली, सड़कों संबंधी योजनाओं का जिक्र किया। नगर प्रशासक ने स्मार्ट सिटी के बाइक शेयरिंग, डड्डूमाजरा के डंपिंग ग्राउंड की माइनिंग से जुड़े प्रोजेक्ट का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि डड्डूमाजरा के लोगों को राहत मिलेगी। पांच लाख टन कचरे को बायोमाइनिंग से हटाया जाएगा। शहर स्मार्ट सिटी बनने की राह पर है। इस कड़ी में सितंबर के अंत तक 29 एमजीडी पानी की आपूर्ति शुरू होगी। शहर में स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं को बेहतर किया जा रहा है। नगर प्रशासन ने एलान किया कि लावारिस कुत्तों को लेकर राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन का आयोजन 28 सितंबर किया जाएगा।
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डेढ़ वर्ष के अंदर नगर निगम में दूसरी बार आए प्रशासक

पिछले साल जनवरी के बाद अब यह दूसरा मौका है जब प्रशासक नगर निगम सदन को संबोधित करने निगम आए। उन्होंने अभिभाषण में फंड जारी करने की दिशा में किसी तरह की कोई बात नहीं की। उन्होंने कहा कि चौथे दिल्ली वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार रेवेन्यू साझा करने की लंबे समय से मांग को गृह मंत्रालय के पास स्वीकृति के लिए भेजा है। जब अनुमोदन प्राप्त होगा तो नगर निगम को उसका उचित राजस्व हिस्सा मिलना शुरू होगा।

10 दिन के ट्रायल के बाद 20 दिन में 24 घंटे पानी मिलेगा : मेयर
मेयर राजेश कालिया ने कहा कि 10 दिन के ट्रायल के बाद 20 दिन के अंदर 24 घंटे पानी की सप्लाई शुरू हो जाएगी। मेयर ने प्रशासक से शहर के विकास के लिए 198 करोड़ रुपये की मांग की। इसमें 13 गांव के विकास के लिए 50 करोड़, टायलेट ब्लाक की रेनोवेशन के लिए 19 करोड़, सड़कों की मरम्मत के लिए 92 करोड़ और सेक्टर 39 में पानी की क्षमता बढ़ाने के लिए 37 करोड़ रुपये की मांग की गई। मेयर ने कहा कि नगर निगम के पास पैसे की काफी कमी है। इस कारण कई प्रोजेक्ट अधर में हैं। उन्होंने नगर प्रशासक के सामने कहा कि वे आवश्यक धनराशि मुहैया करवाकर निगम की सहायता करें ताकि प्रोजेक्ट सिरे चढ़ाए जा सकें।

गांव को मिले शहरों जैसी सुविधाएं : बदनौर
प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने कहा कि 13 गांव जो नगर निगम में शामिल किए गए हैं उनमें शहरों जैसी सुविधा मिलें इसे ध्यान में रखते हुए गांव की विकास की योजनाएं तैयार की जाएं। इन क्षेत्रों को गांव नहीं माना जाना चाहिए। प्रशासन इन गांव के विकास के लिए धन की व्यवस्था का प्रयास करेगा। गांव के विकास के लिए ग्राम सलाहकार समितियां बनाई जाएं। इसमें गांव के गण्यमान्य व्यक्तियों को शामिल किया जाए।

 
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पार्षदों को अपने एरिया में कड़ी मेहनत की नसीहत

प्रशासक ने भाषण के दौरान वार्ड पार्षदों को कड़ी मेहनत करने को कहा। उन्होंने कहा कि आप अपने एरिया में कड़ी मेहनत कर लक्ष्य हासिल करें। प्रशासक ने निगम को पार्किंग सुविधा दुरुस्त करने को कहा। उन्होंने निगम को ठोस रणनीति तैयार करने को कहा ताकि पार्किंग स्थलों का दरों के साथ सही तरीके से संचालन हो सके। वहीं, प्रशासक के अभिभाषण को सुनने के लिए भाजपा में शामिल हुईं पूर्व मेयर पूनम शर्मा उपस्थित रहीं। समारोह के लिए पूर्व मेयर को निमंत्रण भेजा गया था। इसी तरह विपक्षी पार्टी कांग्रेस की तरफ कोई बड़ा नेता मौजूद नहीं था।

समारोह में प्रशासक ने फंड देने की बात तो नहीं की, लेकिन उम्मीद है कि प्रशासक की ओर से फंड जारी कर दिया जाएगा। जब चंडीगढ़ में वित्त आयोग लागू हो जाएगा तब निगम को आत्मनिर्भर बनने के साथ बाहर से सहायता मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- राजेश कालिया, मेयर नगर निगम चंडीगढ़।

भाजपा के इशारे पर हो रहा है भेदभाव: छाबड़ा
नगर निगम में कांग्रेस के कोई पूर्व मेयर ने मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया। लगातार पिछले 5 वर्ष में जबसे भाजपा सरकार बनी तब से किसी भी पूर्व मेयर या कांग्रेस के नेताओं को किसी भी कमेटी में जगह नहीं दी गई। न ही किसी सरकारी कार्यक्रम में बुलाया जाता है। सिवाय 26 जनवरी और 15 अगस्त के। यह भेदभाव की राजनीति कभी कांग्रेस ने नहीं की। इसी विरोध की वजह से कांग्रेस के पूर्व मेयर इस मीटिंग में नहीं गए।
- प्रदीप छाबड़ा, पूर्व मेयर और प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस पार्टी चंडीगढ़।
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