पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में एनजीओ द्वारा मेंटली चैलेंज्ड बच्चों के लिए चलाए जा रहे केंद्रों के बारे में हाईकोर्ट ने दो माह में पॉलिसी बनाने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने कहा है कि पॉलिसी बनाकर ऐसे केंद्रों की निगरानी की जाए।
चीफ जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अरुण पल्ली पर आधारित डिवीजन बेंच ने पंजाब, हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन को आज से दो माह का समय पॉलिसी फ्रेम करने के लिए दिया है। बेंच ने कहा है कि यह देखा जाए कि यह एनजीओ सरकार से फंड ले रही हैं या नहीं।
चंडीगढ़ के नारी निकेतन केस का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने कहा कि 9 जून, 2009 को चंडीगढ़ प्रशासन के लिए हाईकोर्ट ने गाइड लाइन जारी की थीं। उनमें अब संशोधन की जरूरत है।
इस दौरान उन्होंने कोर्ट के समक्ष पटियाला में हुई एक छापे की कार्रवाई का ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि 10 मार्च, 2014 को स्वास्थ्य विभाग की एक टीम ने छापे की कार्रवाई के दौरान विशेष बच्चों के लिए बने नवजीवनी स्कूल से एक्सपायरड 150 कार्टून जूस के बरामद किए थे।
उन्होंने बाल निकेतन सेक्टर-15 चंडीगढ़ का भी हवाला दिया। जहां समाज कल्याण विभाग का एक सुपरवाइजर यौन उत्पीड़न का आरोपी ठहराया गया है।