सिख संगठनों और राजनेताओं के दबाव के बाद आखिरकार यूटी प्रशासन हेलमेट मामले में बैकफुट पर आ गया और हेलमेट पहनने या न पहनने का फैसला सिख महिलाओं पर छोड़ दिया। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद बुधवार को चंडीगढ़ प्रशासन ने सभी सिख महिलाओं को फौरी राहत दे दी। अब सिख महिलाओं के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य नहीं बल्कि वैकल्पिक हो गया है। प्रशासन के नए फरमान के तहत यदि सिख महिलाएं हेलमेट पहनती हैं तो भी ठीक है और यदि नहीं पहनती हैं तो उनका चालान नहीं किया जाएगा।
एमएचए से निर्देश मिलने के बाद यूटी प्रशासन ने पटकाधारी सिख महिलाओं को छोड़कर सभी सिख महिलाओं के हेलमेट पहनने की अनिवार्यता खत्म कर दी है। वहीं, ट्रांसपोर्ट विभाग ने भी अपना फैसला बदलने के लिए पूरे मामले में पब्लिक की राय लेने का फैसला किया है। पब्लिक से यह पूछा जाएगा कि सिख महिलाओं को हेलमेट पहनने में छूट देनी चाहिए या नहीं। विभाग ने इसका मसौदा तैयार कर मंगलवार को अपनी वेबसाइट पर भी डाल दिया है। इसके बाद जो ओपिनियन आएगी, उसे यूटी के प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के पास भेजा जाएगा। इसके बाद आखिरी फैसला वही लेंगे।
बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यूटी प्रशासन को बीते दिनों निर्देश दिया था कि यूटी में भी दिल्ली की तर्ज पर सिख महिलाओं को हेलमेट पहनने में छूट देने को लेकर कोई निर्णय लिया जाए। इसके लिए पुराने नोटिफिकेशन को नए सिरे से जारी करने को कहा गया था। एमएचए के फरमान के बाद प्रशासन केंद्रीय गृह मंत्रालय और हाईकोर्ट के निर्णय के बीच फंसा है। इस मसले पर अगर वो गृह मंत्रालय की बात मानता है तो हाईकोर्ट के निशाने पर आता है जबकि अगर हेलमेट अनिवार्य करता है तो गृह मंत्रालय के सवालों के जवाब उसे देने पड़ेंगे।
अपनी साख बचाने के लिए यूटी प्रशासन के ट्रांसपोर्ट विभाग ने मामले में पब्लिक ओपिनियन लेने का फैसला किया है। यानी जितनी ज्यादा पब्लिक हेलमेट को लेकर अपनी राय देगी उतना प्रशासन के ऊपर से दबाव घटेगा। अगर पब्लिक हर महिला के लिए हेलमेट अनिवार्य करने पर मुहर लगाती है तो प्रशासन पर से गृह मंत्रालय का दबाव हटेगा। अगर पब्लिक सिख महिलाओं के लिए हेलमेट हटाने पर मोहर लगाती है तो इस फैसले को हाईकोर्ट के सामने रखा जाएगा। प्रशासन लोगों को अपनी राय रखने के लिए करीब 15 दिन का वक्त देने की बात कह रहा है।
इस मसले हम हर पहलू को देख रहे हैं। लोगों की राय ली जा रही है। इसके बाद पब्लिक रेफरेंडम के निर्णय को प्रशासक के पास भेज दिया जाएगा। वही अंतिम फैसला लेंगे।
- अजय कुमार सिंगला, ट्रांसपोर्ट सेक्रेटरी यूटी