ठंड बढ़ रही है। इसमें कई प्रकार की बीमारियां आती हैं। इन बीमारियों से कैसे बचें, इसके लिए आहार और व्यवहार की जरूरत है। घरेलू उपाय से ही ठंड से बचा जा सकता है। आहार और विहार ठंड से बचाएगा।
यह बता रहे हैं सीनियर आयुर्वेदिक फिजिशियन व ड्रग इंसपेक्टर यूटी चंडीगढ़ के डाक्टर राजीव कपिला। कपिला का कहना है कि बच्चे वृद्धों और कमजोर व्यक्ति के लिए यह ठंड कष्टदायक है।
ऐसे में ठंड से बचना अति आवश्यक है। ऐसे समय में ज्वर, नजला, जुकाम आदि रोग हो जाते हैं। इसमें गरम आहार विहार जरूरी है। ठंड में स्वास की बीमारी, जोड़ों में दर्द, हृदय रोग आदि पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है।
हेमंत ऋतु में सूर्य की किरणें तीव्र नहीं होतीं वातावरण में ठंडक रहती है। इसमें प्रतिश्याय(नजला), शीत पीत(खारिस), कास (खांसी) और पाददारी (पैर फटना) जैसे बीमारी की पूरी आशंका होती है। इससे बचने के लिए शीतोपलाद का चूर्ण, शहद और जोशांदा काफी कारगर होती है।
शहर में काली मिर्च, शुंडी, पीपली आदि का चूर्ण बनाकर उसका सेवन से ठंड दूर होती है। जोशांदा को पानी में उबालकर ग्रहण किया जा सकता है। छोटे बच्चों को शहद व शितोपलादि चूर्ण का दिन में तीन बार हितकर होता है। नाक में सरसों का तेल डालें।
मकोई, चावल, ज्वार, गेहूं भिंडी, कददू पालक, पत्तागोभी, फूल गोभी, टमाटर, करेला, उड़द, चौली, मूंग, मटन, मुर्गी का मांस, मछली, झिंगा, सूरन, गाजर, अदरक प्याज सिंघाड़ा, कमलगट्टा, अखरोट, सेव केला, काले मुन्नके, संतरा, चीकू, बेर, फालसा, अन्नानास, अमरूद, सीताफल, घी दूध, मक्खन, खोया, पनीर, मलाई, गुनगुना पानी, शक्कर, तिल, लांग, काजू बादाम, पिस्ता का सेवन लाभदायक होता है।
विहार में तैलाभ्यंग, उबटन लगाना, धूप का सेवन, उष्ण गर्भगृह में रहना, वाहन, गरम वस्त्र परिधान करना, अर्घशक्ति व्यायाम करना शामिल है।